30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान पंचायत चुनाव: पंच, सरपंच से जिला परिषद तक, सभी भावी उम्मीदवारों के काम की खबर

Rajasthan Panchayat Election: पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकाय चुनावों में नामांकन प्रक्रिया को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है।

2 min read
Google source verification
rajasthan panchyat chunav

Photo- Ai

Rajasthan Panchayat Election : पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकाय चुनावों में नामांकन प्रक्रिया को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। जयपुर ग्रामीण के बस्सी, चाकसू, जमवारामगढ़ सहित पूरे प्रदेश में आगामी पंचायत एवं नगर पालिका चुनावों में नाम निर्देशन पत्र के साथ लगाए जाने वाले घोषणा पत्र व शपथपत्रों में झूठी या गलत जानकारी देना अब प्रत्याशियों को भारी पड़ सकता है।

आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा करने पर प्रत्याशी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य सहित सभी पदों के प्रत्याशियों को अपनी संपत्ति, आपराधिक प्रकरण, शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य अनिवार्य जानकारियां शपथपत्र के रूप में प्रस्तुत करनी होंगी।

पिछले चुनावों से लिया सबक

इन जानकारियों का उद्देश्य मतदाताओं को प्रत्याशी की वास्तविक स्थिति से अवगत कराना है। आयोग ने माना है कि पूर्व चुनावों में कई प्रत्याशियों द्वारा जानबूझकर तथ्य छुपाए गए या गलत विवरण दिया गया।

उल्लेखनीय है कि पिछले पंचायत चुनावों में संतान व शिक्षा संबंधी गलत जानकारी देने के मामलों में कई सरपंचों को बाद में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इसी अनुभव के आधार पर आयोग ने इस बार पहले से ही सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

चुनाव पूर्व अयोग्यता की जांच नहीं

मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों के अनुसार किसी अभ्यर्थी की अयोग्यता की जांच चुनाव से पहले राज्य सरकार नहीं कर सकती। अयोग्यता से जुड़े विवाद केवल चुनाव याचिका के माध्यम से जिला न्यायालय द्वारा तय किए जाएंगे और यह निर्णय चुनाव परिणाम के बाद होगा। नामांकन के समय प्रशासन केवल औपचारिक प्रक्रिया निभाएगा।

झूठा शपथपत्र बना अपराध

हालांकि आयोग ने यह भी साफ किया है कि यदि कोई प्रत्याशी जानबूझकर झूठा शपथपत्र देता है या किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छुपाता है, तो यह आपराधिक कृत्य माना जाएगा। ऐसे मामलों में रिटर्निंग अधिकारी या जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा सक्षम न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया जाएगा।

रिटर्निंग अधिकारी करेंगे जांच

निर्देशों के तहत नाम निर्देशन पत्रों के साथ लगाए गए शपथपत्रों की प्रारंभिक जांच रिटर्निंग अधिकारी करेंगे। यदि प्रथम दृष्टया गलत जानकारी या झूठा तथ्य सामने आता है, तो इसकी रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी को भेजी जाएगी और आगे कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

फौजदारी कार्रवाई का प्रावधान

यदि कोई प्रत्याशी लंबित आपराधिक मामलों या संपत्ति का गलत विवरण देता है, तो यह भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध होगा। इसमें झूठा साक्ष्य और मिथ्या घोषणा पर सजा का प्रावधान है।

पुराने आदेश निरस्त, बढ़ेगी पारदर्शिता

आयोग ने पुराने भ्रमित करने वाले आदेशों को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया है कि अब गलत घोषणा करने पर सीधी कानूनी कार्रवाई होगी। इन निर्देशों से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।