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अनुभूति नेचर कैंप में बच्चों ने जाना प्रकृति का महत्व, संरक्षण की ली शपथ

Students got an opportunity to connect with nature.

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बैतूल। दक्षिण बैतूल वनमण्डल के ताप्ती वन परिक्षेत्र अंतर्गत 15 जनवरी को अनुभूति नेचर कैंप का आयोजन किया गया। अनुभूति कार्यक्रम वर्ष 2025-26 के अंतर्गत यह आयोजन पिपरिया में संपन्न हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि पिपरिया समिति के अध्यक्ष सुकराम धुर्वे, जनपद सदस्य गोदान परते एवं सरपंच श्रीमती कलावती बाई की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में उपमंडलाधिकारी कैलाश भद्रकारे एवं ताप्ती वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री दयानंद डेहरिया विशेष रूप से मौजूद रहे। इस अवसर पर छात्र-छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा वन विभाग का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

कार्यक्रम के दौरान अनुभूति मास्टर ट्रेनर के. एल. चंदेलकर एवं पर्यावरण प्रेमी पंकज राठौर, कामूलाल इवने तथा वनरक्षक श्रीमती प्रियंका डेहरिया द्वारा बच्चों को कैंप स्थल पर अनुभूति कार्यक्रम की संक्षिप्त ब्रीफिंग दी गई। बच्चों को अनुभूति की प्रमुख थीम मैं भी बाघ, हम हैं बदलाव एवं हम हैं धरती के दूत के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही अनुभूति की आचार संहिता एवं पूरे दिन के कार्यक्रम की रूपरेखा समझाई गई।

- प्रकृति पथ पर मिला सीखने का अनुभव

इसके पश्चात छात्र-छात्राओं को तीन समूहों में विभाजित कर प्रकृति पथ पर भ्रमण कराया गया। इस दौरान घास, सूखे पत्ते, विभिन्न वृक्ष, झाड़ियां एवं औषधीय पौधों की पहचान कराई गई तथा उनकी उपयोगिता, महत्व, संरक्षण एवं संवर्धन की जानकारी दी गई। बच्चों को दीमक की बामी, मधुमक्खी के छत्ते, बया पक्षी का घोंसला, शाकाहारी एवं मांसाहारी वन्य जीव, सर्प, गिद्ध एवं अन्य पक्षियों के बारे में भी रोचक जानकारी दी गई।

- खेल, गतिविधियां के साथ पर्यावरण का दिया संदेश

कार्यक्रम में साहसिक गतिविधियां, खाद्य-जाल, खाद्य-श्रृंखला, मैं हूं कौन जैसे रोचक खेल, क्विज प्रश्नोत्तरी एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। सभी गतिविधियों के पश्चात पुरस्कार वितरण किया गया। इस समृद्ध अनुभव के साथ सभी प्रतिभागियों ने प्रकृति संरक्षण की शपथ ली और सामूहिक अनुभूति गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

- इन वन कर्मियों का रहा विशेष सहयोग

अनुभूति नेचर कैंप के दौरान वन विभाग के कर्मचारी ओंकार नाथ मालवीय, मनोज मोरे, प्रवीण गुप्ता, अनिता सलामे, कृष्ण कुमार डांडोलिया, दीप्ति राजपूत, महेंद्र आठवले, सूरज बेठे एवं इंद्रदेव बारस्कर द्वारा बच्चों को फील्ड भ्रमण करवाकर प्रकृति के प्रति जागरूक किया गया।