
Gold-Silver Price (Patrika File Photo)
Gold Silver Price: भीलवाड़ा: केंद्रीय बजट की उलटी गिनती के बीच अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट में आए एक जबरदस्त भूकंप ने निवेशकों और सराफा कारोबारियों को हिलाकर रख दिया है। चांदी की कीमतों में पिछले कुछ समय से चल रही अंधाधुंध सट्टेबाजी का 'गुब्बारा' आखिरकार फूट गया है। बजट से ठीक पहले आई यह ऐतिहासिक गिरावट बाजार के जानकारों के लिए भी चौंकाने वाली है।
वैश्विक बाजार में आई बिकवाली की आंधी का असर आंकड़ों में साफ दिख रहा है। चांदी- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 120 डॉलर के शिखर से लुढ़ककर अब 84.47 डॉलर पर आ गई है। स्थानीय बाजार में इसके भाव 2.75 लाख प्रति किलो बोले जा रहे हैं।
सोना- पीली धातु भी 5602 डॉलर से गिरकर 4879 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। घरेलू बाजार में सोना 1.63 लाख (प्रति 10 ग्राम) के करीब है। सोने-चांदी के साथ कच्चे तेल में भी नरमी देखी गई है, जिससे महंगाई से जूझ रही जनता को मामूली राहत के संकेत मिले हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे अमेरिकी बाजार की गतिविधियां मुख्य कारण हैं। शुक्रवार को अमेरिका में सौदे काटने का आखिरी दिन था। बाजार में अफरा-तफरी का आलम यह था कि निवेशक अपनी होल्डिंग बेचना चाह रहे थे, लेकिन बाजार में खरीदार गायब थे।
आमतौर पर सौदे अगले महीने के लिए 'रोल ओवर' किए जाते हैं, लेकिन इस बार अनिश्चितता के कारण ऐसा नहीं हुआ, जिससे कीमतें धड़ाम हो गईं। युद्ध और बजट का 'डबल रिस्क'भले ही अभी कीमतें गिरी हैं, लेकिन बाजार पूरी तरह जोखिम मुक्त नहीं है।
विशेषज्ञों ने दो बड़े कारकों की ओर इशारा किया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी में युद्ध की आहट पैदा कर दी है। यदि कोई सैन्य कार्रवाई होती है, तो बाजार तुरंत 'यू-टर्न' ले सकता है और कीमतें फिर आसमान छू सकती हैं।
सराफा विशेषज्ञ का मानना है कि रविवार को पेश हो रहे बजट में टैक्स और ड्यूटी को लेकर होने वाली घोषणाएं सोने-चांदी की अगली दिशा तय करेंगी। बाजार फिलहाल अनिश्चितता के दौर में है। एक तरफ बजट की उम्मीदें हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध के बादल। निवेशकों को फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की नीति अपनानी चाहिए।
Updated on:
01 Feb 2026 10:49 am
Published on:
01 Feb 2026 10:28 am
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