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बड़ा खुलासा: भीलवाड़ा में ‘भगवान भरोसे’ पशुधन, दो साल से टीकाकरण ठप

– वीसी में खुली पोल: पशुपालक का दर्द, ‘साहब! कोई सुध लेने नहीं आता पशुपालन विभाग के दावों की हकीकत उस वक्त तार-तार हुई, जब केंद्र सरकार की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) में जमीनी सच्चाई सामने आई। जिले में बेजुबानों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। यहां पिछले दो साल से पशुओं में […]

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Major revelation: Livestock in Bhilwara left to fend for themselves, vaccination program stalled for two years.

Major revelation: Livestock in Bhilwara left to fend for themselves, vaccination program stalled for two years.

- वीसी में खुली पोल: पशुपालक का दर्द, 'साहब! कोई सुध लेने नहीं आता

पशुपालन विभाग के दावों की हकीकत उस वक्त तार-तार हुई, जब केंद्र सरकार की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) में जमीनी सच्चाई सामने आई। जिले में बेजुबानों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। यहां पिछले दो साल से पशुओं में एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण हुआ ही नहीं है। हालात यह हैं कि सरकारी कार्मिक नदारद और पशुपालक महंगे निजी इलाज कराने को मजबूर हैं। मामले का खुलासा तब हुआ जब शहर से छह किलोमीटर दूर नया समेलिया के जागरूक पशुपालक सत्यनारायण ने वीसी के दौरान सीधे शिकायत दर्ज कराई। खुलासे के बाद जयपुर तक हड़कंप मच गया। राजस्थान पशुपालन सचिव डॉ. सुमित शर्मा ने मामले को गंभीर लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। जिले की प्रभारी सचिव मंजू राजपाल तक भी गड़बड़झाला पहुंचा।

दो साल का सूखा, पशुपालक बेहाल

पशुपालक सत्यनारायण ने बताया कि नया समेलिया क्षेत्र में पिछले दो साल से कोई भी सरकारी कर्मचारी टीकाकरण के लिए नहीं आया। उन्होंने गठिला खेड़ा पशु उप स्वास्थ्य केंद्र और आटूण केंद्र की लचर व्यवस्था की पोल खोली। उन्होंने बताया कि जब भी पशु बीमार होते हैं, सरकारी अस्पताल से कोई मदद नहीं मिलती, मजबूरी में प्राइवेट डॉक्टरों को बुलाकर इलाज करवाना पड़ता है। शिकायत में सबसे गंभीर आरोप गठिला खेड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र पर लगे हैं। यहां पदस्थापित एलएसए (पशुधन सहायक) प्रीतिबाला स्वर्णकार के बारे में बताया गया कि वे कभी सब-सेंटर पर जाती ही नहीं हैं। बिना कार्मिकों के यह केंद्र केवल एक इमारत बनकर रह गया है। यही हाल कमोबेश आटूण और जिले के अन्य केंद्रों का भी बताया जा रहा है।

शर्मा ने किया सवाल: दो साल में कितने पशु की मौत हुई

पशुपालन सचिव डॉ. सुमित शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि शहर के इतना नजदीक होने के बाद भी कोई नहीं आता है। शर्मा ने सवाल किया कि इन दो सालों में किसी पशु की मौत हुई क्या। पशुपालक ने सत्यनारायण ने बताया कि लंपी बीमारी के दौरान पशुओं की मौत हुई थी। शर्मा ने सभी को निर्देश दिए कि जब उपचार व दवाएं निशुल्क मिलती है तो पशुपालक को राशि खर्च करनी पड़ रही है यह गंभीर बात है। शर्मा तुरंत ही 1962 पर अपनी शिकायत दर्ज कराने की बात कही। वीसी के दौरान ही पशुपालक ने फोन किया औैर बताया कि नया समेलिया में भैस बीमार है, लेकिन आटूण व बीड़ का खेड़ा तथा भीलवाड़ा से भी कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं मिला।

एक्शन मोड में सरकार: सचिव ने तलब की सबकी हाजिरी

वीसी में पोल खुलने के बाद पशुपालन विभाग के शासन सचिव शर्मा ने सख्त रुख अपनाया। डॉ. शर्मा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जिले के सभी पशु चिकित्सालयों और उप केंद्रों से कार्मिकों की 'तत्काल उपस्थिति' का ब्यौरा मांगा है।