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अब फ्री में होगा ‘कैंसर’ का इलाज, बिना आयुष्मान कार्ड धारकों को भी मिलेगा फायदा

MP News: अस्पताल प्रबंधन के अनुसार लीनियर एक्सीलेटर मशीन से आयुष्मान कार्ड धारकों के साथ-साथ उन मरीजों का भी मुफ्त इलाज किया जाएगा, जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है।

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Cancer

Cancer (Photo Source - Patrika)

MP News: अब हमीदिया अस्पताल में जानलेवा कैंसर का उपचार पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और आसान होगा। इलाज के दौरान न तो दर्द होगा और न ही मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ेगा। हमीदिया के कैंसर विभाग में अत्याधुनिक कैंसर यूनिट विकसित की जा रही है। यहां लीनियर एक्सीलेटर मशीन स्थापित की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह आधुनिक मशीन कैंसरग्रस्त हिस्से की कोशिकाओं को नष्ट करती है।

इससे दिल, फेफड़े, दिमाग, किडनी और रीढ़ की हड्डी जैसे महत्वपूर्ण अंग सुरक्षित रहते हैं। मशीन शुरू होने के बाद ब्रेन ट्यूमर और अन्य गंभीर कैंसर मरीजों को महीनों तक दर्द सहन नहीं करना पड़ेगा और कई मामलों में बिना सर्जरी के ही इलाज संभव होगा। इससे सिर- गर्दन, स्तन, फेफड़े, प्रोस्टेट, ब्रेन ट्यूमर और सर्वाइकल कैंसर का उपचार किया जाएगा।

बिना शुल्क के होगा उपचार

इस सुविधा का सबसे बड़ा लाभ गरीब मरीजों को मिलेगा। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार लीनियर एक्सीलेटर मशीन से आयुष्मान कार्ड धारकों के साथ-साथ उन मरीजों का भी मुफ्त इलाज किया जाएगा, जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है। निजी अस्पतालों में इसी इलाज का खर्च 70 हजार से 1.7 लाख रुपये तक आता है।

तैयार हो रहा कैंसर यूनिट

करीब 25 करोड़ रुपए की लागत से कैंसर यूनिट विकसित किया जा रहा है। मशीन स्थापना के लिए आधुनिक बंकर बनकर तैयार हो चुका है और मशीन खरीदने की टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता एन. सिंह के अनुसार नए कैंसर यूनिट में छह लीनियर एक्सीलेटर मशीनें स्थापित करने का प्रस्ताव मंजूर हो चुका है और इसे समय पर शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।

ऐसे काम करती है मशीन

सीटी या एमआरआइ स्कैन से ट्यूमर की सटीक लोकेशन तय की जाती है। कंम्प्यूटर से रेडिएशन की मात्रा, दिशा और समय निर्धारित होता है। मशीन 360 डिग्री घूमकर ट्यूमर पर रेडिएशन देती है, जिससे कैंसर कोशिकाओं का डीएनए नष्ट होकर वे धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं।

आसान और सुरक्षित उपचार

इलाज में दर्द नहीं होता, कई मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। आमतौर पर एक सत्र में 10 से 20 मिनट लगते हैं और मरीज उसी दिन घर लौट सकता है।