
Kailash Kher in MP: (Photo: FB)
Kailash Kher in Bhopal: कहते हैं कि युवा यह नहीं पसंद कर रहा। उसे पॉप चाहिए, फिल्मी चाहिए। युवा नशे में नाच रहा है, मेरा मानना है कि जब नशे में डूबकर नाचा जा सकता है, तो हमारे साहित्य, हमारे शब्दों और हमारे विचारों में तो गहरा नशा है, उसे भी युवा पसंद करेगा। सवाल यह नहीं कि युवा को क्या पसंद है, सवाल यह है कि उसे क्या परोसा जा रहा है।
यह कहना है गायक और संगीतकार कैलाश खेर का। वह मंगलवार को खेलो एमपी यूथ गेम्स (MP Youth Game) में प्रस्तुति देने भोपाल आये। प्रस्तुत हैं उनसे चर्चा के प्रमुख अंश… युवा लौट रहा जड़ों की ओर युवाओं में पाश्चात्य संस्कृति की ओर झुकाव को लेकर खेर ने कहा कि जो भटका था, वह अब लौट रहा है। कई लोग सिलिकॉन वैली और विदेश से वापस भारत आ रहे हैं। डॉलर कमाने के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि वहां सुख नहीं है। अब लोग आत्मचिंतन कर रहे हैं और अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि पढ़- लिखकर, पैसा कमाकर इंसान तनाव में घिर जाता है। गुस्सा और टकराव बढ़ते हैं। ऐसे समय में खेल, संगीत और कला ही हैं, जो समाज को तनाव, क्रोध और थकान से राहत देते हैं। यही संगीत की ताकत है।
कैलाश खेर ने कहा कि हर व्यक्ति मोबाइल फोन पर ही खुश है। वह सोशल मीडिया में अपना सुख ढूंढ रहा है। ऐसे में संगीत एक सुकून देता है। खेर ने कहा कि मैं फिल्मों में गायक बनने के इरादे से मुंबई नहीं आया था, बल्कि अल्बम बनाने आया था, जो आत्मा से जुड़े।
MP Youth Games में शामिल हुए खेर ने कहा कि रिकॉर्डेड म्यूजिक और लाइव एक-दूसरे के पूरक हैं। रिकॉर्डेड म्यूजिक से पता चलता है कि गीत आया है और लाइव से उस गीत की आत्मा लोगों तक पहुंचती है। यह ठीक वैसा है जैसे भोजन और व्रत, पहले भोजन जरूरी है, तभी शरीर व्रत के योग्य बनता है।
Published on:
28 Jan 2026 04:47 pm
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