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Rajasthan: राजकीय वृक्ष खेजड़ी के लिए महापड़ाव, 458 पर्यावरण प्रेमियों ने अन्न-जल त्यागा, प्रशासन अलर्ट

राजस्थान के बीकानेर कलक्ट्रेट के सामने बड़े स्तर पर खेजड़ी बचाओ आंदोलन शुरू हो गया है। मंगलवार को 458 पर्यावरण प्रेमी अन्न-जल त्याग कर धरने पर बैठ गए।

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Bikaner

महापड़ाव स्थल पर बैठी महिलाएं व पर्यावरण प्रेमी। (फोटो-पत्रिका)

बीकानेर। पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले खेजड़ी बचाओ आंदोलन का महापड़ाव मंगलवार को दूसरे दिन जारी रहा। बिश्नोई धर्मशाला के सामने बने पंडाल में सुबह 458 पर्यावरण प्रेमियों ने अन्न-जल का त्याग कर अनशन शुरू कर दिया। आंदोलनकारी राज्य सरकार से चालू विधानसभा सत्र में ही ट्री प्रोटेक्शन बिल लाने, राज्य वृक्ष खेजड़ी काटने पर पूर्णतया पाबंदी लगाने की मांग कर रहे हैं।

पब्लिक पार्क (जिला कलक्ट्रेट परिसर) में प्रवेश और निकासी के मार्गों पर पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है। आंदोलन को देखते हुए जिला कलक्ट्रेट के आस-पास बल्लियां लगाकर बेरिकेटिंग भी की गई है। मुकाम पीठाधीश्वर रामानंद आचार्य व सच्चिदानंद आचार्य की अगुवाई में 50 संतों ने पड़ाव स्थल पर मंच संभाल रखा है। दिनभर संत प्रवचन, भजन और पर्यावरण और खेजड़ी पर अपने विचार रखते रहे।

363 के आह्वान पर 458 बैठे

महापड़ाव में 363 लोगों के अनशन पर बैठने की अपील की गई। परंतु धरने पर माला पहनाकर अनशन पर बैठाना शुरू किया तो 458 लोग आगे आ गए। सभी ने अन्न-जल का त्याग कर दिया है।

शहीद निहालचंद के बुजुर्ग पिता भी पहुंचे

धरने में बिश्नोई महासभा के पदाधिकारी, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, दिव्यांग, वन्यजीवों के लिए शहीद हुए शौर्य चक्र प्राप्त निहालचंद धारणिया के 92 वर्षीय पिता हनुमाना राम भी शामिल रहे। साथ ही संघर्ष समिति के संयोजक रामगोपाल बिश्नोई, पर्यावरण से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि, वरिष्ठ कांग्रेसी भंवरसिंह भाटी व महेन्द्र गहलोत सहित कई नेता समर्थन में धरने पर बैठे है।

प्रशासन की आंदोलन पर नजर

जिला प्रशासन आंदोलन पर नजर रखे हुए है। सादी वर्दी में पुलिसकर्मी और स्टेट सीआइडी के अधिकारी पड़ाव स्थल पर सक्रिय रहे। धरने में बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी से भी प्रशासन दबाव में है। साथ ही बीकानेर के साथ श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बाड़मेर, जोधपुर आदि जिलों से भी लोग पहुंचे हुए है।

आंदोलनकारियों की दो मांग

  • राजस्थान विधानसभा में ट्री प्रोटेक्शन कानून पास किया जाए। इसके लिए सरकार लिखित में तारीख की घोषणा करे।
  • राज्य के मुख्य सचिव आदेश निकालें कि 50 साल से अधिक पुराने राज्य वृक्ष खेजड़ी और अन्य पेड़ को किसी भी सरकारी परियोजना के लिए नहीं काटा जाएगा। ऐसे पेड़ काटने पर पूर्णतया प्रतिबंधित लगे, यदि पेड़ काटा जाता है तो संबंधित क्षेत्र के कलक्टर, थानाधिकारी, तहसीलदार आदि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।