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तलाक, तलाक, तलाक… ‘हक’ ही नहीं ‘रिवाज’ भी दिखाती है टूटते परिवार का दर्द, जिसे देख आंखें हो जाएंगी नम

Movie On Triple Talaq Rivaj: तलाक सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि वो टूटते परिवार की उस पीड़ा का आईना है जो शब्दों में नहीं बयां की जा सकती। जिस फिल्म की हम यहां चर्चा कर रहे इसमें तलाक के दर्द को बखूबी दिखाया गया है।

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तलाक, तलाक, तलाक… 'हक' ही नहीं 'रिवाज' भी दिखाती है टूटते परिवार का दर्द, जिसे देख आंखें नम हो जाएंगी

फिल्म 'रिवाज' (सोर्स: IMDb)

Movie On Triple Talaq Rivaj: समाज की एक कड़वी सच्चाई तीन तलाक को फिल्म 'रिवाज' के जरिए बेहद इमोशनल और दर्दनाक तरीके से स्क्रीन पर पेश किया गया है। तलाक पहले के दौर की वो प्रथा थी जहां एक खत, एक मैसेज या सिर्फ एक शब्द से किसी महिला की पूरी दुनिया उजाड़ दी जाती थी। बता दें, इस फिल्म की नायिका जैनब भी इसी दर्दनाक प्रथा का शिकार बनती है, जब उसे स्पीड पोस्ट के द्वारा तलाक का नोटिस मिलता है। 'रिवाज' तीन तलाक से मिले दर्द, अपमान और उस मानसिक टूटन को गहराई से दिखाती है, जिससे एक महिला गुजरती है, जो उसके लिए खौफनाक सीन की तरह होता है।

तीन तलाक से मिले दर्द और समाज का दबाव

अगर फिल्म की कहानी की बात करें तो, कहानी जैनब (मायरा सरीन) से शुरू होती है, जो एक साहसी लेकिन स्ट्रॉग लेडी होती है और समाज के दबाव में उसकी शादी हनीफ (आफताब शिवदासानी) से होती है, लेकिन ये रिश्ता जल्द ही उसके लिए एक बुरे सपने जैसा होता है। हनीफ और उसके ससुराल वाले जैनब को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। वो दिन-रात घर के कामों में उलझी रहती है और हर दर्द को चुपचाप सहती है। हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि उसे अबॉर्शन के लिए मारा पीटा जाता है।

बता दें, जब जैनब पूरी तरह टूट जाती है, तो वो अपने माता-पिता के घर जाने का फैसला करती है, लेकिन उसके घर छोड़ते ही, पति हनीफ उसे स्पीड पोस्ट के जरिए तीन तलाक का नोटिस भेज देता है। एक खत के साथ सालों का रिश्ता खत्म कर दिया जाता है। इस तलाक के बाद जैनब अकेली पड़ जाती है और उसे कानून, समाज और अपने ही लोगों के तानों का सामना करना पड़ता है। इसमें एक औरत की जिंदगी को इतना दर्दनाक बनाकर पेश किया गया है कि इसे देख आपकी आंखों से आंसू निकल जाएंगे, इसकी कहानी बहुत ही दमदार है।

किरदार दर्शकों को गुस्सा दिलाने में कामयाब

एक्ट्रेस मायरा सरीन की एक्टिंग ने अपनी डेब्यू फिल्म में जैनब के दर्द और मजबूती को ईमानदारी से दिखाया है और आफताब शिवदासानी ने नेगेटिव रोल में बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है और उनका किरदार दर्शकों को गुस्सा दिलाने में कामयाब रहा है।

इतना ही नहीं, मिथुन चक्रवर्ती की एंट्री के बाद फिल्म की पकड़ और मजबूत हो जाती है। उनका किरदार, दमदार डायलॉग्स और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरते हैं। जया प्रदा एक एक्टिविस्ट के रूप में और जाकिर हुसैन एक विरोधी वकील के छोटे लेकिन असरदार रोल में नजर आए हैं, जो कहानी को और भी दमदार बनाते हैं। बता दें, इसकी कहानी फिल्म 'हक' से काफी अलग है लेकिन मुद्दा तलाक वाला ही है, फिल्म रिवाज को देख आप 'हक' को कनेक्ट कर सकते है। 'रिवाज' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि तीन तलाक जैसी सामाजिक बुराई पर एक सशक्त टिप्पणी भी है।