
प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: AI)
India-US Trade Deal Dairy Products: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर लगातार बातचीत चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अमेरिका के साथ हुई डील की घोषणा कर दी है। दोनों देशों के बीच टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर कई दौर की चर्चा हो चुकी है। इसी बीच बड़ा संकेत यह है कि भारत इस समझौते में अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी सेक्टर को शामिल नहीं करेगा।
भारत सरकार का मानना है कि डेयरी और कृषि क्षेत्र सीधे तौर पर करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से जुड़े हैं। इसलिए इन क्षेत्रों को किसी भी मुक्त व्यापार समझौते में शामिल करना जोखिम भरा हो सकता है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अमेरिका से दूध, दही, घी और अन्य डेयरी उत्पादों के आयात की अनुमति देने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। यह रुख भारत की उस पारंपरिक नीति के अनुरूप है, जिसमें संवेदनशील कृषि उत्पादों को व्यापार समझौतों से बाहर रखा जाता रहा है। पहले भी भारत ने ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ हुई बातचीत में डेयरी सेक्टर को सुरक्षित रखा था।
डेयरी भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। देश में करोड़ों परिवार दूध उत्पादन से जुड़े हैं और यही उनकी आय का स्थायी स्रोत है। सरकार का तर्क है कि सस्ते अमेरिकी डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में आने से स्थानीय किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। इससे दूध की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा और छोटे उत्पादक प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगे। इसी कारण भारत किसी भी कीमत पर डेयरी बाजार को पूरी तरह खोलने के पक्ष में नहीं है। रिपोर्ट का कहना है कि किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित India-US ट्रेड डील में औद्योगिक और कुछ गैर-संवेदनशील उत्पादों पर टैरिफ में कटौती बताई गई है। पिछले 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात रखी गई। अमेरिका की ओर से दावा किया गया है कि भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को घटाया जाएगा, जबकि भारत भी कुछ क्षेत्रों में आयात शुल्क कम करने पर विचार करेगा। हालांकि, डेयरी और प्रमुख कृषि उत्पाद इस दायरे से बाहर रहेंगे। दोनों देशों के अधिकारी अभी समझौते के दस्तावेजीकरण पर काम कर रहे हैं।
Published on:
03 Feb 2026 02:22 pm
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