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घोषणा हुई, प्रस्ताव भटका, मंजूरी अटकी: छतरपुर को नगर निगम बनाने का सपना नौकरशाही की फाइलों में कैद

तीन माह पूर्व फाइल दोबारा नगरीय प्रशासन विभाग के अपर सचिव को भेजी गई, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। अधिकारियों के अनुसार यदि अब जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आगामी चुनावी प्रक्रिया के कारण छतरपुर को नगर निगम बनने के लिए पूरे पांच साल और इंतजार करना पड़ सकता है।

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छतरपुर नगरपालिका

भोपाल की मंजूरी ने थाम रखा शहर का भविष्य, प्रक्रिया में लगना है एक साल, 2027 में पंचायत चुनाव के पहले कार्यवाही जरूरी

छतरपुर शहर को नगर निगम बनाने की घोषणा जून 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई थी। घोषणा को अब लगभग तीन साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नगर निगम गठन की प्रक्रिया अब भी कागजों से आगे नहीं बढ़ पाई है। नगरीय निकाय एवं आवास विभाग भोपाल में फाइल अटकी होने के कारण छतरपुर नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा मिलने की दिशा में कोई ठोस निर्णय अब तक नहीं हो सका है।

दोबारा भेजी गई फाइल पर तीन माह में निर्णय नहीं

जिला प्रशासन और नगर पालिका द्वारा करीब एक वर्ष पूर्व नगर निगम गठन का प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा गया था। प्रस्ताव में तकनीकी और प्रक्रियात्मक खामियां पाए जाने पर फाइल वापस लौटा दी गई। इसके बाद आवश्यक सुधार कर लगभग तीन माह पूर्व फाइल दोबारा नगरीय प्रशासन विभाग के अपर सचिव को भेजी गई, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। अधिकारियों के अनुसार यदि अब जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आगामी चुनावी प्रक्रिया के कारण छतरपुर को नगर निगम बनने के लिए पूरे पांच साल और इंतजार करना पड़ सकता है।

प्रक्रिया में ही लगेंगे एक साल

पूर्व सीएमओ डीडी तिवारी के अनुसार नगर निगम गठन के लिए तीन लाख की आबादी का मानदंड और अन्य सभी आवश्यक प्रक्रियाएं नगर पालिका और जिला प्रशासन द्वारा पूरी कर ली गई हैं। शहर की सीमा का विस्तार करते हुए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। प्रस्ताव को नगरीय प्रशासन से मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट की स्वीकृति, राज्यपाल की अनुमति और अंत में गजट नोटिफिकेशन के लिए भेजा जाएगा। इन सभी प्रक्रियाओं में न्यूनतम एक वर्ष का समय लगना तय माना जा रहा है।

दोबारा गए प्रस्ताव में दूर की थी खामियां

दोबारा भेजी गई फाइल में छतरपुर नगर निगम में शामिल किए जाने वाले गांवों का पूरा विवरण दिया गया है। इसमें गांवों के नाम, जनसंख्या, सर्वे नंबर, क्षेत्रफल, कोर ग्राम से दूरी, गूगल मैप और रंगीन नक्शे के साथ-साथ ग्राम पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों की जानकारी भी संलग्न की गई है। राजस्व विभाग द्वारा तैयार नक्शे में छतरपुर की परिधि से 10 किलोमीटर के भीतर स्थित गांवों को चिन्हित किया गया है। इन गांवों से लगभग एक लाख की जनसंख्या नगर निगम क्षेत्र में जोड़ी जाएगी। बगौता, ढड़ारी, बजरंगगढ़, बूदौर, अतरार, रामगढ़, गुरैया, बूढ़ा, आमहार, ब्रजपुरा, सिमरिया, मौराहा, गठेवरा, बरकहा, कांटी, पलौठा, सरानी, खांप, निवारी, खमरी, मोरवा, कलानी, भगवंतपुर, मारवा, कैंडी, धमौरा, गौरगांय, हमा, सूरजपुर, मुआसी, सौरा, मलपुरा, टुरया, हतना, पठापुर, देरी, कतरवारा, बाजनापुरवा, राधेनगर, परा, ललौनी और चंद्रपुरा जैसे गांव प्रस्ताव में शामिल हैं। करीब 20 से अधिक गांवों के जुडऩे से प्रस्तावित नगर निगम का क्षेत्रफल 20628.19 हेक्टेयर हो जाएगा, जो वर्तमान नगर पालिका क्षेत्रफल से लगभग छह गुना अधिक होगा।

इसलिए लगेंगे पांच साल

सबसे अहम सवाल यह है कि अगर अभी नगर निगम की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो पांच साल क्यों लगेंगे। दरअसल, नगर निगम गठन के लिए जिन ग्राम पंचायतों को शहरी सीमा में शामिल किया जाना है, उनका कार्यकाल अभी शेष है। कानून के अनुसार किसी भी ग्राम पंचायत को उसका कार्यकाल पूरा होने से पहले शहरी क्षेत्र में शामिल नहीं किया जा सकता। पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने में लगभग डेढ़ साल का समय बचा है। यदि इस अवधि में नगर निगम का गठन नहीं हुआ और पंचायत चुनाव हो गए, तो नए सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरे पांच साल के लिए शुरू हो जाएगा। इसके बाद इन गांवों को नगर निगम सीमा में शामिल करना कानूनी रूप से संभव नहीं रहेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया स्वत: ही पांच साल के लिए टल जाएगी।

नगर पालिका चुनाव भी बन सकता है अड़चन

इसी तरह नगर पालिका चुनाव भी बड़ी बाधा बन सकते हैं। नगर पालिका चुनाव में अब लगभग डेढ़ साल का समय बचा है। यदि उससे पहले नगर निगम की अधिसूचना जारी नहीं हुई तो नए नगर पालिका प्रतिनिधियों का कार्यकाल शुरू हो जाएगा, जो अगले पांच वर्षों तक नगर निगम गठन में अड़चन बनेगा। नगर पालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्यकाल के दौरान संरचना परिवर्तन संभव नहीं होता।

तीन साल बीत गए

नगर पालिका और राजस्व प्रशासन के पास घोषणा के बाद चार साल का समय था, जिसमें से तीन साल बीत चुके हैं। बावजूद इसके प्रस्ताव को अब तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिल पाई है। यदि अगले कुछ महीनों में भोपाल स्तर पर निर्णय नहीं लिया गया तो छतरपुर के नागरिकों को नगर निगम बनने के लाभ जैसे बड़े विकास कार्य, अतिरिक्त बजट, बेहतर शहरी सुविधाएं और सशक्त प्रशासनिक ढांचा के लिए कम से कम पांच साल और इंतजार करना पड़ेगा।

अधिकारी बोले -प्रक्रिया जारी है

नगरीय विकास एवं आवास विभाग कमिश्नर संकेत भोड़वे का कहना है कि छतरपुर नगर पालिका को नगर निगम बनाए जाने की प्रक्रिया जारी है और भोपाल से प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल शहर की निगाहें भोपाल पर टिकी हैं, जहां से एक फैसले पर छतरपुर के भविष्य की दिशा तय होनी है।

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