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बदहाली में हाइब्रिड सोलर प्लांट योजना, जिले के 74 स्कूलों में लगाए गए पैनल आधे से ज्यादा खराब, गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप

जिले के 74 स्कूलों में लगे सवा करोड़ की लागत के पैनल आधे से ज्यादा खराब हो चुके हैं और बीते एक साल से उनकी न तो मरम्मत हो पाई है और ना ही बदला गया है।

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solar plant

सोलर प्लांट

बिजली बिल कम और पर्यावरण को लाभ पहुंचाने के मकसद से बनी थी नीति

बिजली बिल कम और पर्यावरण को लाभ पहुंचाने के मकसद से बनी हाइब्रिड सोलर प्लांट योजना जिले में बदहाली में हैं। योजना के दो साल होने को हैं। इसके तहत जिले के 74 स्कूलों में लगे सवा करोड़ की लागत के पैनल आधे से ज्यादा खराब हो चुके हैं और बीते एक साल से उनकी न तो मरम्मत हो पाई है और ना ही बदला गया है। इन प्लांट के माध्यम से स्कूलों में बिजली खपत को कम करते हुए पर्यावरण को लाभ पहुंचाने की योजना शासन की थी, जो अब विभाग की लापरवाही ासे दम तोड़ती नजर आ रही है। सोलर पैनल की योजना भी भ्रष्टाचार व अनदेखी का शिकार हो चुकी है।

सवा करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई

वर्ष 2023-24 में नीति आयोग द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग में सीधे आए बजट से तत्कालीन कलेक्टर के निर्देशन में एक 8 सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी, ताकि जिले के 74 स्कूलों में सोलर पैनल लगाए जा सकें। इसके लिए सवा करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। इस प्रक्रिया में तय किया गया था कि स्कूलों में हाइब्रिड सोलर पैनल लगाए जाएंगे, ताकि स्कूलों की बिजली खपत कम हो सके और साथ ही अतिरिक्त बिजली का उत्पादन भी किया जा सके। हालांकि, इस योजना के तहत लगाए गए पैनल न तो हाइब्रिड हैं और न ही उनकी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप।

नॉन-हाइब्रिड पैनल लगाए गए

कई स्कूलों में नॉन-हाइब्रिड पैनल लगाए गए, जिनकी कार्यक्षमता भी बेहद खराब़ हैं। सोलर पैनल लगाने के नाम पर ना तो तय मानकों के अनुसार पैनल लगाए गए, न ही उनकी मरम्मत की गई और न ही जरूरत के अनुसार उचित सामग्री का उपयोग किया गया। परिणामस्वरूप सोलर पैनल अधिकांश स्कूलों में खराब हो गए और एक साल के भीतर ही काम करना बंद कर दिया। वहीं आधे से ज्यादा पैनल खराब हो चुके हैं।अधिकांश स्कूलों में सोलर पैनल के लिए निर्धारित उपकरण नहीं लगाए गए हैं। न ही बैटरियों के लिए उचित स्टैंड बनाए गए हैं। जहां बैटरियों के लिए वुडन रैक का प्रावधान था, वहां लकड़ी की तख्तियां और टूटे-फूटे स्टैंड पर बैटरियां रखी गई हैं। सोलर पैनल का स्ट्रक्चर भी खराब हालत में है और तडि़त चालक जैसी महत्वपूर्ण सामग्री भी गायब है।

11 माह से बंद पैनल

जिले के कुर्राहा हाईस्कूल में सोलर पैनल मार्च 2025 से बंद पड़ा है, यहां न तो पैनल को बदला गया है और ना ही उसकी मरम्मत कराई गई है। जबकि जबलपुर की सेफरोन सोलर सिस्टम कंपनी द्वारा सोलर पैनल लगाए गए थे। लेकिन यहां पर भी समस्याएं शुरू से ही थीं। पीवीसी पाइप फिटिंग खराब थीं, बैटरियों के तार खुले में पड़े हुए थे, और इनवर्टर और बैटरियों को लकड़ी की तख्तियों और टूटी कुर्सियों पर रखा गया था। इस मुद्दे पर स्कूल प्राचार्य का कहना है कि यह सब कुछ उनके कार्यकाल से पहले की प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि इस पूरे काम की प्रक्रिया उच्च अधिकारियों के निर्देश पर की गई थी। यहां तक कि पैनल भी नॉन-ग्रिड थे, जबकि शासन ने निर्धारित किया था कि हाइब्रिड पैनल लगाए जाएं। इसके बावजूद अधिकारियों ने सत्यापन रिपोर्ट दे दी और पूरी राशि का भुगतान कर दिया।

इनवर्टर से काम चला रहे

घुवारा के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी सोलर पैनल सिस्टम पिछले एक साल से बंद पड़ा है। यहां पर पीवीसी पाइपलाइन उखड़ी पड़ी है, बैटरियां जमीन पर रखी हुई हैं और इनवर्टर भी खराब हो चुका है। स्कूल के लिपिक रामप्रसाद अहिरवार का कहना है कि इस सोलर सिस्टम को ठीक करने के लिए उन्होंने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब वे घर के इनवर्टर से काम चला रहे हैं, क्योंकि स्कूल के सोलर सिस्टम में कोई सुधार नहीं किया जा रहा है। इस विषय पर जिला शिक्षा अधिकारी अरुण शंकर पांडेय से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल अटेंड नहीं किया।