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स्मैक, हीरोइन और इंजेक्शन जैसी आदतें छुटाने शहर के युवा कर रहे लोगों को जागरूक, 250 लोगों ने नशे से बनाई दूरी

युवा और ओएसटी केंद्र नशा करने वालों को मुफ्त दवा देकर लत को दूर कर रहा है और अभी तक करीब ढाई सौ लोगों ने नशे से दूरी बना ली है।

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ओएसटी सेंटर

गांव-गांव जाकर दे रहे प्रशिक्षण व मॉनीटिरिंग

जिले में नशे की लत पैर पसार रही है और लगातार नशे की लत से हजारो लोग परेशान हैं साथ ही उनके परिवार में दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। नशे की लत लोगों को मौत के मुह में धकेल रही है। इसी को देखते हुए शहर के युवा जिला अस्पताल के ओएसटी केंद्र के साथ मिलकर नशा करने वालों को मददगार साबित हो रहे हैं। यह युवा और ओएसटी केंद्र नशा करने वालों को मुफ्त दवा देकर लत को दूर कर रहा है और अभी तक करीब ढाई सौ लोगों ने नशे से दूरी बना ली है। एक सर्वे के अनुसार जिले में लगभग चालीस प्रतिशत युवा नशे की लत से परेशान है। साथ ही एचआईवी संक्रमित लोगों को भी गाइड करने का काम शहर के युवाओं की टीम द्वारा किया जा रहा है।

करीब एक साल खानी पड़ती है दवा

शहर के योगेश साहू और उनका ग्रुप नशा करने वाले लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वहीं ओएसटी सेंटर के प्रभारी बृजेश चतुर्वेदी का कहना है कि उनके यहां करीब 250 रजिस्ट्रेशन इस वर्ष हुए हैं। सेंटर में हीरोइन, स्मैग, इंजेक्शन के आदी लोग, गांजा और शराब जैसे नशे को दूर करने की दवा दी जाती है। यह दवा कारगार है। यदि किसी व्यक्ति जो नशे का सेवन करता है उसने एक साल तक दवा का सेवन किया तो शत प्रतिशत नशामुक्त हो जाता है। ओएसटी में नशे के आदी व्यक्ति को उसके नशे के डोज के हिसाब से दवा दी जा रही है। इसमें चिकित्सक के मार्गदर्शन में दवा का वितरण और सेवन कराया जाता है। डॉक्टर विक्टिम से उसकी नशे की हिस्ट्री और सेवन की मात्रा जानकर उस हिसाब से दवा देते हैं।

लोगों को कर रहे अवेयर

शहर के योगेश साहू और उनकी टीम मिलकर जिले भर में जाकर लोगों को नशे और एचआइवी के बारे में जागरूक कर रहे हैं। योगेश ने बताया कि जिले भर में एचआइवी के लक्षण वाले लोगों की संख्या तीन सौ है। इन्हें हम लोग अपनी भाषा में आइडी यूजर कहते हैं। ये ऐसे लोग हैं जो इंजेक्शन के माध्यम से नशे का सेवन करते थे और संक्रमित सुई के माध्यम से एचआइवी के लक्षण वाली श्रेणी में आ गए। इन लोगों को हमारी टीम सबसे पहले तो नशा छुड़वाने में मदद कर रही है। उसके बाद जिला अस्पताल छतरपुर और बीएमसी सागर में परीक्षण कराने ले जाती है। साथ ही हर तीन माह में इनका चैकअप करवाते हैं।

सेंटर में आना अनिवार्य

ओएसटी सेंटर में जो भी रजिस्ट्रेशन हैं उनको चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही दवा का सेवन कराया जा रहा है। इसके लिए दिन में एक बार दवा को लेना जरुरी है और सेंटर में ही आपको दवा खानी पड़ेगी। घर पर ले जाने की अनुमति नहीं है। कई बार नशा करने वाला दवा घर ले जाकर उसका सेवन नहीं करता इस वजह से उन्हें चिकित्सक के सामने ही दवा दे रहे हैं।

करीब ढाई सौ लोग रजिस्टर्ड

ओएसटी में नशा करने वाले दो सौ लोग रजिस्टर्ड हैं। जिनमें से करीब 170 लोग नियमित रूप से दवा का सेवन कर रहे हैं। ओएटी सेंटर नशा के विरुद्ध सकारात्मक कदम उठा रहा है। योगेश का कहना है कि जिले में 140 लोग एचआरजी (हाई रिस्क ग्रुप) वाले हैं जो एचआइवी ग्रसित हैं उन्हें दवा देते हैं और उनकी मॉनिटिरिंग भी कर रहे हैं। इन लोगों को अभी ओएसटी आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कुछ लोगों में स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक बदलाव भी देखे गए हैं। इन्हें समझाइश दी जा रही है कि किन कारणों से इन्हें एचआइवी फैलाने से रोका जाए। कई बार एचआरजी ग्रुप के लोग नशे की हालत में असुरक्षित यौन संबंध बना लेते हैं तो ऐसे लोगों को सबसे पहले आइडी यूजर में लाया जा रहा है उसके बाद इन्हें ड्रग फ्री कराया जाएगा।

इनका कहना है

करीब 170 लोग सेंटर पर दवा का सेवन कर रहे हैं। जिनकी लत छूट रही है। दवा शत प्रतिशत कारगर है। नियमित रूप से सेवन करना अनिवार्य है।

बृजेश चतुर्वेदी, प्रभारी ओएसटी केंद्र