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कलेक्टर समेत राजस्व के 7 अफसरों और सीएम हेल्पलाइन से मिली निराशा, 3 साल में जनसुनवाई नहीं हुई, जमीन विवाद से टूटे बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट में खुद पर उड़ेला पेट्रोल

बुजुर्ग ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास कर दिया। यह दृश्य न केवल मौजूद लोगों को झकझोर देने वाला था, बल्कि इसने जिले की राजस्व व्यवस्था, जनसुनवाई प्रणाली और सीएम हेल्पलाइन जैसे मंचों की वास्तविक स्थिति को भी उजागर कर दिया।

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बुजुर्ग

मंगलवार को छतरपुर कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई उस वक्त प्रशासनिक संवेदनहीनता और व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बन गई, जब जमीन विवाद से वर्षों से परेशान एक बुजुर्ग ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास कर दिया। यह दृश्य न केवल मौजूद लोगों को झकझोर देने वाला था, बल्कि इसने जिले की राजस्व व्यवस्था, जनसुनवाई प्रणाली और सीएम हेल्पलाइन जैसे मंचों की वास्तविक स्थिति को भी उजागर कर दिया।

घटना कलेक्ट्रेट परिसर में दोपहर 1 बजे उस समय हुई जब लवकुशनगर अनुभाग के बछरोन गांव निवासी वृद्ध रामस्वरूप रुपौलिहा अपनी जमीन के मामले को लेकर जनसुनवाई में आवेदन देने पहुंचे थे। वृद्ध का आरोप है कि वह पिछले तीन वर्षों से कलेक्टर कार्यालय, तहसील, एसडीएम, जनपद, राजस्व विभाग के अधिकारियों और यहां तक कि सीएम हेल्पलाइन तक गुहार लगा चुका है, लेकिन हर बार उसे सिर्फ आश्वासन ही मिले, समाधान नहीं।

तीन साल में नहीं सुनी गई फरियाद


रामस्वरूप रुपौलिहा का कहना है कि उनकी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला वर्षों से लंबित है। उन्होंने कई बार लिखित आवेदन दिए, जनसुनवाई में नाम दर्ज कराया, अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन न तो स्थायी कब्जा हटाया गया और न ही उन्हें कानूनी राहत दिलाई गई। उनका आरोप है कि कलेक्टर समेत राजस्व के कम से कम सात अधिकारी उनके मामले से अवगत हैं, इसके बावजूद फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल घूमती रहीं।

मानसिक तनाव और निराशा की हद


मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान अचानक वृद्ध ने अपने कपड़ों के भीतर छिपाई पेट्रोल की बोतल निकाली और खुद पर उड़ेल ली। इसके बाद उसने माचिस निकालने की कोशिश की। यह देखकर वहां मौजूद फरियादी, कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी सन्न रह गए। कुछ पल के लिए पूरा परिसर अफरा-तफरी में बदल गया। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया। कुछ लोगों ने तुरंत वृद्ध के हाथ से माचिस और पेट्रोल की बोतल छीन ली और उसे काबू में किया। यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो जनसुनवाई एक भयावह त्रासदी में बदल सकती थी।

प्रशासनिक दावे और जमीनी सच्चाई


घटना के बाद डिप्टी कलेक्टर विशा माधवानी ने बताया कि बुजुर्ग की जमीन से तीन बार पहले कब्जा हटाया जा चुका है, लेकिन बाद में दूसरी पार्टी अपर न्यायालय से स्टे ले आई। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग को समझाइश दी गई है। वहीं, लवकुशनगर एसडीएम कौशल सिंह ने एक वीडियो जारी कर बताया कि दो बार कब्जा हटाया गया है। जिनसे विवाद है, उस पार्टी ने अपर आयुक्त सागर न्यायालय में वाद दायर किया है, जिसपर न्यायालय ने यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।

सीएम हेल्पलाइन भी बेअसर


बुजुर्ग का आरोप है कि उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर भी कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां से भी सिर्फ क्लोजिंग की औपचारिकताएं पूरी की गईं। समस्या जस की तस बनी रही। यह घटना सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है, जो कागजों में तो सक्रिय दिखती है, लेकिन जमीनी स्तर पर पीडि़त को राहत नहीं दिला पा रही।

पुलिस ने संभाली स्थिति


घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने वृद्ध को शांत कराया और पूरे मामले की जानकारी ली। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जमीन विवाद लंबे समय से लंबित है और इसी कारण वृद्ध मानसिक रूप से अत्यधिक तनाव में है।