
खेल मैदान
जिले के ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में खेल सामग्री न होने से कई खिलाड़ी प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। स्कूल का पूरा सत्र बीतने को है और करीब हजार से अधिक स्कूलों में पूरी तरह से खेल सामग्री नहीं पहुंच पाई है। जिले के प्राइमरी, मिडिल और हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या 1939 है और इसमें प्रत्येक वर्ष करीब 1500 स्कूलों में खेल सामग्री वितरित होती है। स्कूलों में प्राचार्य व हेडमास्टरों को सीधे तौर पर राशि भेजी जाती है, जिसमें उन्हें छात्रों को खेलने की समाग्री लेनी होती है। जिला मुख्यालय को छोड़कर बाकी स्कूलों में खेल सामग्री का अभाव है। जबकि तीन किस्तों के माध्यम से स्कूलों में सामग्री के लिए राशि आवंटित हो चुकी है।
स्कूलों में खेल प्रतिभाओं को बढ़ाने के लिए प्रायमरी को 5, मिडिल को 15 और हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल को 25-25 हजार रुपए की राशि जिला शिक्षा अधिकारी को दी जाती है। इन पैसों से स्कूलों में लूडो, क्रिकेट किट, कैरम बोर्ड, वॉलीबॉल, फुटबॉल, बैंडमिंटन आदि खेल सामग्री खरीदी जाती है। अब समस्या यह है कि स्कूलों को राशि तो जारी कर दी गई, लेकिन अधिकांश स्कूलों में खेल सामग्री नहीं पहुंच पाई है। वहीं स्कूलों में खेल प्रशिक्षक भी नहीं है जिससे खिलाड़ी छात्रों को मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। जिले में खेल प्रशिक्षकों की संख्या इतनी कम है कि लगभग 4 लाख विद्यार्थी खेल मार्गदर्शन से वंचित हैं। हालात ये हैं कि कुल 218 हायर सेकंडरी और हाईस्कूलों में एक भी प्रशिक्षक ग्रामीण क्षेत्र में नहीं है। पूरे जिले में सिर्फ 11 प्रशिक्षक व एक क्रीड़ा अधिकारी हैं,वो भी सिर्फ जिला मुख्यालय पर हैं।
जिले में बकस्वाहा ब्लॉक के अंतर्गत पहले भी सौ से अधिक माध्यमिक व प्राथमिक शालाओं के लिए साढ़े 11 लाख रूपए खेल सामग्री हेतु आवंटित किए गए थे। ज्यादातर स्कूलों में खेल सामग्री ही नहीं खरीदी गई थी। 109 प्राथमिक शाला में पांच हजार रूपए तथा 60 माध्यमिक शालाओं में 10 हजार रूपए प्रत्येक शाला के मान से राशि खातों में सिर्फ खेल सामग्री खरीदने के लिए भेजी गई लेकिन एक सैकड़ा से अधिक ऐसे विद्यालय हैं जहां सामग्री ही नहीं खरीदी गई थी कई स्कूलों में तो सिर्फ जनपद शिक्षा केन्द्र से सामग्री भेजकर बिल दे दिए गए थे।स्पोट्र्स किट में भी भ्रष्टाचार, बच्चों के हाथ खालीशिक्षा विभाग द्वारा हर स्कूल को खेल सामग्री के लिए वार्षिक फंड दिया जाता है। हायर सेकंडरी स्कूल को 25000 और मिडिल स्कूल को 15000। लेकिन यह राशि भी घोटालों की भेंट चढ़ जाती है। लवकुशनगर और बकस्वाहा में बीते वर्षो में किट खरीदी को लेकर हुए घोटालों की जांच की मांग उठी थी, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप अधिकतर स्कूलों में स्पोट्र्स किट नदारद है।
छतरपुर जिले में हायर सेकंडरी और हाईस्कूल मिलाकर कुल 218 विद्यालय हैं, जिनमें 1.14 लाख विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। यदि कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी स्कूलों की बात करें, तो कुल 1939 स्कूलों में 4.81 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। लेकिन खेल की शिक्षा देने वाले प्रशिक्षकों की संख्या मात्र 12 है। नतीजा यह कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ी प्रशिक्षण और मंच दोनों से वंचित हैं। इन विद्यालयों में प्रशिक्षकों की नियुक्ति न होने से न तो छात्र खेल की बारीकियों को समझ पाते हैं, न ही राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है। हर वर्ष हजारों प्रतिभाएं बिना पहचान के गुमनामी में खो जाती हैं।
शिक्षा विभाग के नियमानुसार प्रत्येक हायर सेकंडरी और हाईस्कूल में एक प्रशिक्षक अनिवार्य रूप से होना चाहिए। लेकिन यह व्यवस्था वर्षों से सिर्फ फाइलों में चल रही है। खेल गतिविधियों की अनुपलब्धता के चलते विद्यार्थी न तो उत्साहित हो पाते हैं, न ही खेलों में करियर बनाने की दिशा में कोई पहल कर सकते हैं।
एक नजर में राशि पर नजर
स्कूलों की संख्या दी गई राशि
प्रायमरी स्कूलों की संख्या- 1100 - 55 लाख रुपए रुपए
मिडिल स्कूलों की संख्या- 615 92 लाख 25 हजार रुपए
हाई-हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या- 218 -54 लाख 50 हजार रुपए
जिले में करीब 1800 से ऊपर स्कूल हैं और प्रायमरी, मिडिल और हाई-हायर सेकेंडरी में खेल सामग्री के लिए राशि भेजी जाती है। प्राचार्य और हेडमास्टरों द्वारा सामग्री क्रय होती है। जिन स्कूलों में सामग्री नहीं पहुंची है उनकी जांच करवाता हूं। वहीं आगामी राशि मार्च में की जाएगी। जिससे नए सत्र में छात्रों को सामग्री उपलब्ध होगी।
अरुण शंकर पांडेय, जिला शिक्षा अधिकारी
Updated on:
28 Jan 2026 10:48 am
Published on:
28 Jan 2026 10:47 am
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