
कच्चा मकान
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नगर पालिका छतरपुर में सैकड़ों गरीब परिवारों का घर का सपना अधूरा रह गया है। योजना के अंतर्गत जिन हितग्राहियों को पहली और दूसरी किस्त दे दी गई, उन्हें अब दस्तावेज जांच, पट्टा, रजिस्ट्री और जियो टैगिंग की खामियों के नाम पर अपात्र बताकर तीसरी किस्त से वंचित किया जा रहा है। हालात यह हैं कि निर्माण पूरा होने के बाद भी करीब 1700 हितग्राही वर्षों से नगर पालिका के चक्कर काट रहे हैं।
नगर पालिका छतरपुर में वर्ष 2015 से 2018 के बीच चार डीपीआर के माध्यम से कुल 5900 आवास स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 4200 हितग्राहियों को तीनों किस्तों का भुगतान हो चुका है, लेकिन शेष हितग्राहियों को अब तक योजना का पूरा लाभ नहीं मिल सका है। दूसरी या तीसरी किस्त के लिए ये हितग्राही लगातार कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो पा रहा।
योजना की सबसे बड़ी विसंगति यह है कि जिन लोगों को पात्र मानकर दो किस्तें दी गईं, उन्हें अब दस्तावेजों की दोबारा जांच में अपात्र बताया जा रहा है। कई मामलों में बिना मकान की भौतिक जांच किए ही निर्माण कार्य शुरू करने के नोटिस जारी कर दिए गए, जबकि अनेक हितग्राही पहले ही मकान बनाकर रह रहे हैं। इससे हितग्राहियों में भ्रम और नाराजगी बढ़ती जा रही है। चार डीपीआर के लिए चार उपयंत्री प्रभारी नियुक्त किए गए हैं, जिन पर योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद 2051 और 1504 डीपीआर से जुड़े सैकड़ों हितग्राही दूसरी और तीसरी किस्त के लिए भटक रहे हैं। जिन हितग्राहियों ने अब तक निर्माण शुरू नहीं किया, उनसे वसूली भी नहीं हो पाई है, वहीं जिनका निर्माण पूरा हो चुका है, उन्हें अंतिम किस्त नहीं मिल रही।
गोकुलधाम कॉलोनी निवासी जमुना अहिरवार ने बताया कि वह पिछले 15 वर्षों से उसी कॉलोनी में रह रहे हैं। नगर पालिका की टैक्स रसीद के आधार पर उनके नाम पीएम आवास स्वीकृत हुआ और दो किस्तें भी मिल गईं। उन्होंने कर्ज लेकर मकान का निर्माण पूरा कर लिया, लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी तीसरी किस्त नहीं मिली। कर्ज चुकाने के लिए उन्हें परिवार सहित दिल्ली जाकर मजदूरी करनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि उनकी कॉलोनी में ऐसे करीब 40 आवास हैं, जिनके पास न तो रजिस्ट्री है और न ही पट्टा, फिर भी उन्हें योजना में शामिल किया गया।
नगर पालिका क्षेत्र के 40 वार्डों में से कई वार्ड ग्रामीण सीमा से सटे हुए हैं। इन क्षेत्रों से पीएम आवास योजना के तहत आए करीब 250 आवेदन होल्ड कर दिए गए हैं। अधिकारियों का तर्क है कि इन रजिस्ट्रियों में नगरीय निकाय शुल्क दर्ज नहीं है। सर्वे के दौरान जिन आवेदकों की रजिस्ट्री में नगरीय शुल्क नहीं पाया गया, उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया।
लक्ष्मण कॉलोनी निवासी सुरेश अहिरवार ने बताया कि उनका नाम 2053 डीपीआर में शामिल है। उन्होंने मकान का निर्माण पूरा कर लिया है, लेकिन जियो टैगिंग नहीं होने के कारण तीसरी किस्त अटकी हुई है। एक साल से अधिक समय से वे नगर पालिका के चक्कर लगा रहे हैं। इसी तरह वार्ड 17 छत्रसाल नगर निवासी महेश साहू ने भी बताया कि मकान निर्माण पूर्ण होने के बाद भी उन्हें अंतिम किस्त का इंतजार करना पड़ रहा है।
रजिस्ट्री शुल्क को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जिन रजिस्ट्रियों में स्टांप शुल्क के साथ नगरीय शुल्क दर्ज है, उन्हें योजना में प्राथमिकता मिली, जबकि कई वार्डों में रजिस्ट्री लेखक नगरीय शुल्क जोड़े बिना ही रजिस्ट्री कर रहे हैं। चंद्रपुरा निवासी सुमित रजक और गौरैया रोड निवासी दीनदयाल वर्मा ने बताया कि वे दो वर्षों से नगर पालिका को टैक्स दे रहे हैं, इसके बावजूद पीएम आवास योजना 2.0 में आवेदन करने पर उन्हें यह कहकर अपात्र घोषित कर दिया गया कि उनका प्लॉट शहरी क्षेत्र में नहीं आता।
इस पूरे मामले पर एडीएम मिलिंद नागदेवे का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी हितग्राहियों को समय पर राशि देने के निर्देश दिए गए हैं। छतरपुर में यह समस्या क्यों आ रही है, इसकी जांच कराई जाएगी।
Published on:
04 Feb 2026 10:51 am
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