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कुंडलपुर में 20 साल पहले भगवान आदिनाथ की मूर्ति का ऐसे हुआ था विहार

छोटे बाबा की तप साधना बड़े बाबा आकाश मार्ग से विहार करते हुए उच्चासन पर विराजमान हुए बड़े बाबा के चरणों में निर्वाण लाडू चढ़ाया गया, उच्चासन दिवस मनाया गया, मैं उन पलों का साक्षी रहा हूं : मुनि पदम सागर

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दमोह

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Samved Jain

Jan 19, 2026

Bade Baba Kundalpur

दमोह. सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ कुंडलपुर में मुनि पदमसागर के सानिध्य में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का मोक्ष कल्याणक व बड़ेबाबा का उच्चासन दिवस धूमधाम से मनाया गया । प्रचार मंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि इस अवसर पर प्रात: बड़े बाबा महामंडल विधान, भक्तांमर महामंडल विधान, बड़ेबाबा का अभिषेक, रिद्धि कलश, शांतिधारा हुई। अत्यंत भक्तिभाव के साथ निर्वाण लाडू चढ़ाया गया ।


इस अवसर पर कुंडलपुर में विराजमान मुनि पदमसागर महाराज ने शांतिधारा का वाचन करते हुए अपने आशीष वचनों में कहा यह सौभाग्य हर किसी व्यक्ति को नहीं मिलता हमने अनंत भवों में ऐसा पुण्य किया है, जब ऐसे पंचम काल में चतुर्थ काल जैसा माहौल देखने मिल सका। हमारे आचार्य विद्यासागर ने जन्म लिया और नगर गांव में जाकर जो धर्म प्रभावना तप साधना की वह चतुर्थ कालीन जैसी है।


उन्होंने अपने ज्ञान तप साधना आराधना के माध्यम से हमें पंचम काल में चतुर्थ काल का नजारा दिखा दिया। आचार्यश्री की ही यह कृपा दृष्टि कि यह कुंडलपुर पूरे विश्व में प्रसिद्धि को प्राप्त हुआ है। पहले पुराने मंदिर में भक्तों को भक्ति करने और अभिषेक आदि ठीक से देखने नहीं मिलता था, गुरुदेव ने सोचा बड़े बाबा जैसे विशाल हैं उसी अनुरूप उनका स्थान हो। अपनी तप साधना से सन 2006 में 17 जनवरी को वह अवसर आया जब बड़े बाबा आकाश मार्ग से विहार कर विशाल मंदिर में उच्चासन पर विराजमान हो गए । जब बड़े बाबा आकाश मार्ग से विहार कर रहे थे, उस समय में भी बाजू से ही चल रहा था। सभी शंकाएं व्यवधान पार कर बड़े बाबा बड़े मंदिर में विराजित हुए ।


आचार्यश्री ने बड़े बाबा के चरणों का स्पर्श किया। उस समय अश्रुधार बह निकली यह खुशी के आंसू थे। गुरुदेव ने कहा मैंने कल्पना भी नहीं की थी इतना बड़ा कार्य हो जाएगा। बड़ेबाबा ने मुझे इस योग्य समझा। आचार्य गदगद हो गए उनके जीवन पर्यंत की जो साधना तपस्या थी उसका यह प्रतिफल यह कार्य भूतों ना भविष्यति हुआ । जो स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा । यह कोई छोटा-मोटा कार्य नहीं था । उस समय हम सब की यही भावना थी कि बड़े बाबा के चरणों में हम सभी की मुनि दीक्षा हो । यहां क्षुल्लक, ऐलक आर्यिकाएं दीक्षा हुई है, लेकिन ऐसा क्या बड़े बाबा का संयोग रहा कि मुनि दीक्षाएं नहीं हुई।


इस अवसर पर प्रथम अभिषेक रिद्धि कलश शांतिधारा ,छत्र ,चंवर व निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य आर्श ऋषि मिताली रेखाबेन राजाभाई संयम शाह परिवार सूरत, मनोज सरोज आशीष पारस तक्ष सतीश पुनीत जैन दिल्ली, सतीश अंकुर अयांश पुनीत अनंत जैन दिल्ली, संजय सुरेश चंद जैन दिल्ली ,हंसमुख शाह सोमिल शाह वापी, राजू रंगोली किरण नैंसी निकिता जैन जबलपुर, अतुल अतिशय प्रकाश चंद पटौदी इंदौर ,मुकेश संजय दीपक अजमेर, महेंद्र जितेंद्र जैन सतना, शांतिलाल रमेश रुचि जय बडज़ात्या अजमेर, संजय शैलजा ,पारस जैन पाटन जबलपुर, अक्षत गोल्डी जैन दिल्ली सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने अभिषेक एवं निर्वाण लाडू चढ़ाकर पुण्य संचय किया।


दोपहर में कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी प्रबंधकारिणी की बैठक संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा का निर्णय लिए गए। कुंडलपुर कमेटी के पदाधिकारी सदस्यों की उपस्थिति रही। सायंकाल भक्तांमर दीप अर्चना एवं बड़े बाबा की संगीतमय महा आरती हुई।