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Brijbhushan Sharan Singh and Kalraj Mishra meet in Noida: नोएडा में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र से मुलाकात की। इस मौके पर उन्होंने उनके द्वारा यूजीसी पर दिए गए बयान की तारीफ करते हुए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यूजीसी के लागू होने से समाज का ताना-बाना बिगड़ जाता। सरकार ने भी इसमें मदद की। बृजभूषण शरण सिंह कलराज मिश्र से उनके नोएडा आवास पर मुलाकात करने के लिए आए थे। दरअसल, कलराज मिश्र ने यूजीसी कानून को असंवैधानिक बताते हुए विरोध किया था।
उत्तर प्रदेश के नोएडा में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कलराज मिश्र से मुलाकात की। इस मौके पर उन्होंने गुलदस्ता और अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। मौके पर मौजूद लोगों से कहा कि आप लोगों को यह नहीं पता होगा कि 1989 में पहली बार बिना कहे विधान परिषद का टिकट आपने दिया था। 1991 में एमपी का टिकट भी बिना आवेदन के उन्हें मिला। उन्होंने कभी टिकट के लिए आवेदन नहीं किया।
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि आज मैं स्वागत करने के लिए इसलिए आया हूं कि आपने जो यूजीसी पर बयान दिया है, उससे देश का काफी भला हुआ है। यूजीसी के आने के बाद पूरा ताना-बाना बिगड़ जाता है। यूजीसी के आने के बाद उन्होंने तीन दिन गांव में बिताए, जहां के वातावरण में बदलाव आ रहा था। इसलिए आपको धन्यवाद देने के लिए आ गया। बाद में हमने भी इस पर बयान दिया। सरकार ने भी इसमें सुधार किया। सॉलिसिटर जनरल ने इसका विरोध नहीं किया।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र दो बार प्रदेश के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके साथ ही राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में भी काम कर चुके हैं। 2014 में देवरिया लोकसभा संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए और मोदी सरकार में उन्हें एमएसएमई मंत्री बनाया गया। कलराज मिश्र ने यूजीसी के नए नियम को असंवैधानिक बताते हुए विरोध किया था। उन्होंने कहा कि इस नियम से छात्रों के बीच भेदभाव हो सकता है। इसे जल्द वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सभी छात्रों को अभद्र और भेदभाव वाली टिप्पणी के खिलाफ शिकायत करने का अवसर मिलना चाहिए।
इसके पहले बृजभूषण शरण सिंह ने यूजीसी पर अपनी टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस बिल से भ्रामक स्थिति उत्पन्न हो गई। जिसका देश में विरोध हो रहा है। फेसबुक पर अपना एक वीडियो वायरल करके बृजभूषण शरण सिंह ने कई बच्चों को दिखाया और बोले, "इनके बीच उनके भी बच्चे शामिल हैं जो रोज साथ खेलते कूदते हैं और घर में जो कुछ भी होता है खाते पीते हैं। यह किसी कानून के तहत नहीं होता है बल्कि यह सनातन परंपरा है और यह हमारे नस-नस में है।"
पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि जो नीचे हैं उन्हें ऊपर लाना है। यही हमारी सनातन और सवर्ण परंपरा है। उन्होंने सरकार को संबोधित करते हुए कहा था कि समाज ऑफिस में बैठकर नहीं चलाया जा सकता है। समाज को चलाने के लिए गांव आना पड़ेगा। इस मौके पर उन्होंने कानून बनाने वालों को जमकर फटकार लगाई। बोले, "इस कानून से लोकतंत्र मजबूत नहीं होगा। एससी/एसटी एक्ट, दहेज एक्ट, महिला उत्पीड़न एक्ट बनने के बाद भी उत्पीड़न हो रहा है। इसके साथ ही इसका दुरुपयोग भी किया जा रहा है।
Updated on:
03 Feb 2026 02:10 pm
Published on:
03 Feb 2026 08:47 am
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