
बैठक में मौजूद एसडीम करनैलगंज तथा दोनों पक्ष फोटो सोर्स पत्रिका
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में करनैलगंज से पूर्व विधायक रहे कुंवर अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया के वारिसाना हक को लेकर पारिवारिक विवाद खुलकर सामने आ गया है। दो पत्नियों के पक्षों के बीच चल रही खींचतान अब प्रशासनिक प्रक्रिया तक पहुंच चुकी है।
गोंडा जिले के करनैलगंज क्षेत्र में पूर्व विधायक लल्ला भैया के निधन के बाद परिवार रजिस्टर में वारिसों के नाम दर्ज कराने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह मामला पहली और दूसरी पत्नी के बच्चों के बीच अधिकार को लेकर है। जिसे सुलझाने के लिए प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। बृहस्पतिवार को कटरा शहबाजपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय परिसर में इस संबंध में एक खुली बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता एसडीएम नेहा मिश्रा ने की। उनके साथ बीडीओ सुशील कुमार पांडेय, एडीओ पंचायत राजेश वर्मा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य दोनों पक्षों की बात सुनकर परिवार रजिस्टर में वारिसों की संख्या तय करना था। प्रशासन के सामने यह सवाल है कि रजिस्टर में केवल दो नाम दर्ज किए जाएं या कुल चार। बैठक में लल्ला भैया की दूसरी पत्नी स्वर्गीय मीनाक्षी सिंह के पुत्र होने का दावा करने वाले कुंवर कमलेन मोहन सिंह और कुंवर अजेन मोहन सिंह ने परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आवेदन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज लगाए गए हैं। जिनसे उनका दावा मजबूत होता है।
वहीं पहली पत्नी ममता सिंह के पुत्र कुंवर वेंकटेश मोहन सिंह और कुंवर शारदेन मोहन सिंह, साथ ही बहन कुंवरि शैल सिंह ने इस दावे पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि दोनों आवेदक पूर्व विधायक के पुत्र नहीं हैं। और उनका परिवार से कोई वैधानिक संबंध नहीं है।
बैठक के दौरान ग्रामीणों की राय भी ली गई। पूछताछ में 49 ग्रामीणों ने पूर्व विधायक के दो ही पुत्र होने की बात कही, जबकि नौ ग्रामीणों ने दूसरी पत्नी से भी दो पुत्र होने का समर्थन किया। इस दौरान माहौल कई बार तनावपूर्ण हो गया। जिसे देखते हुए पुलिस को भीड़ नियंत्रित करनी पड़ी। करीब चार घंटे चली इस प्रक्रिया के बाद कोरम पूरा हो सका।
दूसरी ओर, कुंवर कमलेन मोहन सिंह ने फोटो, वीडियो, जन्म प्रमाण पत्र और शैक्षिक अभिलेख दिखाते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोगों पर दबाव डालकर बयान दिलवाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासनिक स्तर पर फैसला उनके पक्ष में नहीं आता है। तो वह न्यायालय का रुख करेंगे। एसडीएम नेहा मिश्रा ने बताया कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। दूसरे पक्ष ने अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा है। सभी अभिलेखों, साक्ष्यों और ग्रामीणों के बयानों के आधार पर टीम यह निर्णय लेगी कि परिवार रजिस्टर में किन-किन नामों को शामिल किया जाएगा।
Updated on:
05 Feb 2026 08:54 pm
Published on:
05 Feb 2026 08:53 pm
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