
जमीन के सौदे में धोखाधड़ी, अशिक्षित महिलाओं के शोषण और करोड़ों की कमाई से जुड़े मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलुवालिया ने द्वितीय अपील प्रकरणों का निपटारा करते हुए न केवल विशिष्ट निष्पादन (स्पेसिफिक परफॉर्मेंस) के लिए दायर वाद को खारिज कर दिया, बल्कि 7 अप्रैल 2011 को निष्पादित बिक्री विलेख को भी शून्य और अमान्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवादित भूमि पहले ही सीलिंग कानून के तहत राज्य सरकार में निहित हो चुकी थी, इसलिए अंततः यह भूमि राज्य सरकार में ही निहित रहेगी। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कथित खरीदारों ने अशिक्षा, गरीबी और कानूनी जानकारी के अभाव का लाभ उठाकर महिलाओं से दस्तावेज तैयार कराए। जिस व्यक्ति ने 4 लाख रुपए में भूमि खरीदी, उसने कुछ ही वर्षों में उसी भूमि को बेचकर करीब 4 करोड़ 17 लाख रुपए से अधिक की राशि अर्जित कर ली। कोर्ट ने यह फैसला शांति प्रजापति बनाम राजकुमार महाजन केस में दिया है।
क्या है मामला
मामला ग्राम जौधुपुरा, तहसील एवं जिला ग्वालियर स्थित सर्वे नंबर 72 व 73 की 2 बीघा 3 बिस्वा से जुड़ा है। इस भूमि का एक हिस्सा अशिक्षित महिलाओं के नाम दर्ज था, जिसे लेकर 2005 में मौखिक और 2010 में लिखित विक्रय अनुबंध किए जाने का दावा किया गया। बाद में 2011 में इसी भूमि का विक्रय लक्ष्मण सिंह यादव के पक्ष में कर दिया गया। इसके बाद भूमि को छोटे-छोटे प्लॉट में काटकर कई लोगों को बेचा गया और करोड़ों रुपए की राशि अर्जित की गई।
कोर्ट ने पूरे मामले को लेकर क्या आदेश दिए
हाईकोर्ट ने कहा कि जिस समय 2005 में कथित मौखिक करार बताया गया, उस समय भूमि पहले ही सीलिंग अधिनियम के तहत राज्य में निहित थी। ऐसे में उस समय किया गया कोई भी करार कानूनन मान्य नहीं हो सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि 15 दिसंबर 2010 को किया गया लिखित विक्रय अनुबंध भी संदेहास्पद है, क्योंकि अशिक्षित महिलाओं से अंगूठा लगवाया गया, लेकिन न तो दस्तावेज पढ़कर सुनाया गया और न ही उप पंजीयक द्वारा इस संबंध में कोई वैधानिक पुष्टि की गई। अशिक्षित महिलाओं का योजनाबद्ध तरीके से शोषण कर उनकी जमीन हथियाने का ज्वलंत उदाहरण है।
- जिन लोगों ने बाद में प्लॉट खरीदे, वे सभी लंबित वाद के दौरान खरीदार बने, इसलिए उन पर ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 52 (लिस पेंडेंस) लागू होगी और वे इस फैसले से बंधे रहेंगे।
- हाईकोर्ट ने निचली अपीलीय अदालत के फैसले को पलटते हुए न केवल विशिष्ट निष्पादन का दावा खारिज किया, बल्कि 2011 का बिक्री विलेख भी रद्द कर दिया।
Published on:
29 Jan 2026 11:13 am
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