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एमपी में ‘700 लोकेशन’ में महंगी होगी जमीन, 100% तक बढ़ेंगे रेट

MP News: अधिकारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ दरें बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक बाजार मूल्य से मेल खाने और चोरी रोकने के लिए है।

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Land prices

Land prices प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

MP News: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कलेक्टर गाइडलाइन में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पंजीयन विभाग ने रजिस्ट्री डेटा का गहन विश्लेषण कर करीब 700 लोकेशनों पर गाइडलाइन बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। यहां दरें 10% से लेकर 100% तक बढ़ सकती हैं, जबकि औसत बढ़ोतरी 20 से 30% के बीच रहने की संभावना है। मुख्य कारण पॉलीगॉन (क्षेत्रीय दायरा) का विस्तार है, जिससे पहले सस्ती लोकेशनों पर रजिस्ट्री शिफ्ट होकर स्टांप ड्यूटी की चोरी होती थी।

प्रस्ताव महानिरीक्षक पंजीयन के समक्ष

विभाग ने उप पंजीयकों की बैठक में प्रस्ताव अंतिम रूप दिया है। आज इसे पंजीयन महानिरीक्षक के समक्ष रखा जाएगा। जिला पंजीयक अशोक शर्मा ने बताया कि मुख्य उद्देश्य गाइडलाइन की विसंगति दूर करना है। पिछले वर्षों में उच्च रजिस्ट्री वाली लोकेशनों पर दरें बढऩे पर खरीदार बगल की सस्ती जगह चुन लेते थे, जिससे भारी नुकसान होता था। अब पॉलीगॉन बढ़ाकर उन क्षेत्रों को भी कवर किया जा रहा है, जहां रजिस्ट्री शिफ्ट हो रही थी। इससे स्टांप ड्यूटी चोरी पर प्रभावी रोक लगेगी और बाजार मूल्य के अनुरूप पारदर्शी दरें तय होंगी।

ये है रेट बढ़ने के कारण

वाल्मीक नगर (मुरार): वर्तमान गाइडलाइन 7000 रुपये प्रति वर्ग मीटर, लेकिन आसपास 14 हजार से अधिक। खरीदार सस्ती लोकेशन चुनते थे। अब 100% बढ़ोतरी से दरें आसपास के स्तर पर पहुंचेंगी।

नई कॉलोनियां व हलके, मजरे: एक हलके में कई लोकेशनों की गाइडलाइन अलग-अलग थी। अब सभी को एक समान किया जा रहा है, जिससे 10 लोकेशनों में एकरूपता आएगी।

अन्य कारण: बैंक फाइनेंस के लिए महंगे सौदे, फार्म फोर व अवैध कॉलोनियों में अंतर, व्यावसायिक संपत्तियों की महंगी रजिस्ट्री, सड़क- टाउनशिप में कारोबार बढऩा।

स्टांप चोरी पर कसा शिकंजा, पारदर्शिता बढ़ेगी

-अधिकारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ दरें बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक बाजार मूल्य से मेल खाने और चोरी रोकने के लिए है। कुछ पॉकेट्स में बढ़ोतरी ज्यादा दिख सकती है, लेकिन समग्र रूप से इससे राजस्व में इजाफा होगा और प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।

-नई गाइडलाइन 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना है। शहरवासियों को सलाह है कि प्रॉपर्टी खरीदने से पहले अपडेटेड दरों की जांच कर लें, क्योंकि यह जमीन-मकान की कीमतों पर सीधा असर डालेगी।