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व्यापारी की अपील कोर्ट में खारिज, घटिया पान मसाला बेचने पर एक लाख का जुर्माना बरकरार

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत घटिया (सब-स्टैंडर्ड) पान मसाला बेचने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय (खाद्य सुरक्षा अपीलीय प्राधिकरण) ने व्यापारी पर

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ग्वालियर . खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत घटिया (सब-स्टैंडर्ड) पान मसाला बेचने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय (खाद्य सुरक्षा अपीलीय प्राधिकरण) ने व्यापारी पर लगाए गए एक लाख रुपए के जुर्माने को सही ठहराया है। न्यायालय ने कहा कि घटिया पान मसाला का सेवन आम जनता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए इस तरह के मामलों में सख्ती जरूरी है। इसी आधार पर अपीलीय प्राधिकरण ने निर्णायक अधिकारी द्वारा लगाया गया एक लाख रुपए का जुर्माना उचित बताते हुए अपील को खारिज कर दिया।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा 8 मई 2023 को ग्वालियर के लश्कर क्षेत्र स्थित रामकुमार गुप्ता की फर्म पर निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान बिक्री के लिए रखे गए पान मसाला के नमूने संदेह के आधार पर लिए गए। जांच में यह नमूना खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया और प्रयोगशाला रिपोर्ट में पान मसाला को सब-स्टैंडर्ड घोषित किया गया। इसके बाद निर्णायक अधिकारी ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 26(2)(2) सहपठित धारा 51 के तहत व्यापारी पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। इस आदेश के खिलाफ व्यापारी ने अपील दायर की थी। जिसमें यह तर्क दिया गया कि नमूने की जांच तय समय-सीमा में नहीं की गई और प्रक्रिया में खामियां हैं।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यद्यपि नमूने के विश्लेषण में समय अधिक लगा, लेकिन इससे मामले की मूल प्रकृति प्रभावित नहीं होती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि देरी मात्र के आधार पर प्रयोगशाला रिपोर्ट को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से नमूना खाद्य मानकों के विपरीत पाया गया हो।

अदालत ने यह भी माना कि व्यापारी द्वारा न तो माल की खरीद से संबंधित बिल प्रस्तुत किए गए और न ही आपूर्तिकर्ता का विवरण दिया गया। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि व्यापारी ने खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया। ऐसे में उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़ा यह मामला गंभीर प्रकृति का है।