
ग्वालियर. बजट का मौसम आते ही आम आदमी के मन में ढेरों उम्मीदें जन्म लेने लगती हैं। विशेषकर महंगाई और टैक्स स्लैब में कमी की घोषणाओं का हर वर्ग को बेसब्री से इंतजार रहता है। केंद्र सरकार का वार्षिक बजट आने में अब 12 दिन ही शेष बचे हैं। ऐसे में हर क्षेत्र से बजट की अपेक्षाएं सरकार के समक्ष रखी जा रही हैं। ग्वालियरवासियों को भी सरकार के केंद्रीय बजट से खासी अपेक्षाएं हैं।
मंजू सिघल, गृहिणी
बजट में हर बार कई लुभावनी बातों का जिक्र किया जाता है लेकिन उन पर जमीनी स्तर पर अमल नहीं हो पाता है। महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है, इस बार के बजट को ऐसा बनाया जाए जिससे महंगाई पर अंकुश लग सके। घरेलू गैस सिलेंडर गृहणियों की प्राथमिक जरूरत है, इसके दामों में कमी की जानी चाहिए।
दीपक श्रीचन्द जैसवानी, कार्यकारिणी सदस्य, मध्यप्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स
पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लेने पर आमजन को सीधे-सीधे 10 से 15 फीसदी का लाभ मिलेगा। जीएसटी लाने के समय एक देश एक टैक्स एक नारा दिया गया था फिर पेट्रोल-डीजल को इसमें शामिल क्यों नहीं किया जाता। लाड़ली बहना-किसानों के खाते में रुपए डालने जैसी योजनाओं से देश की लगभग 15 से 20 फीसदी जनता को ही इसका लाभ मिल रहा है, पेट्रोल/डीजल को जीएसटी में लेने पर 100 फीसदी जनता को इसका लाभ मिलेगा।
नेहा जैन, एंकर
शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी स्कूलों और अस्पतालों के बजट में वृद्धि की जानी चाहिए क्योंकि ये सभी आम आदमी से जुड़ी जरूरतें हैं। इसके साथ ही आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी दरों को तर्कसंगत किया जाना चाहिए ताकि आम आदमी की जेब पर बोझ कम हो। किफायती आवास और बुनियादी ढांचे के विकास से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों के जीवन में सुधार आएगा।
मनोज अग्रवाल (बाबा), सचिव, गालव डिस्ट्रीब्यूटर वेलफेयर एसो.
छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को मजबूत करने के लिए आसान ऋण नीतियां और वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकती है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा। मध्यम वर्ग को आयकर में राहत देने से उनकी क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। जीएसटी प्रक्रिया और सरलीकरण होना चाहिए।
पंकज गोयल, कर सलाहकार
केंद्रीय बजट ऐसा हो जो आम नागरिक को राहत प्रदान करे। व्यापारी वर्ग को मजबूती मिलने से निश्चित तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलेगी। इसमें 10 लाख तक की आय टैक्स फ्री, धारा 80सी की सीमा 3 लाख, हेल्थ इंश्योरेंस में अधिक छूट, आसान जीएसटी और छोटे कारोबारियों को सस्ता लोन देने की प्राथमिकताएं शामिल हों।
Updated on:
19 Jan 2026 05:44 pm
Published on:
19 Jan 2026 05:42 pm
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