
CAT Slams Centre-MP Government Over Cadre Review Delay (फोटो- गूगल मैप फोटो)
Police Officers Promotion Case: जबलपुर पुलिस अधिकारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने केंद्र और राज्य सरकारों को कड़ी फटकार लगाई है। कैट की सदस्य मालिनी अय्यर और सदस्य अखिल कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कैडर रिव्यू (Cadre Review) कोई औपचारिक या विवेकाधीन प्रक्रिया नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों का अनिवार्य दायित्व है।
इस दायित्व के निर्वहन में हुई देरी को प्रशासनिक उदासीनता और निष्क्रियता के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में केंद्र सरकार और राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि अतिरिक्त कैडर रिव्यू की प्रक्रिया 120 दिनों के भीतर पूरी की जाए। कैट ने टीप में कहा, यह अफसरों के भविष्य से खिलवाड़ है। राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के पक्ष में राहतकारी आदेश पारित किए। (MP News)
मप्र पुलिस एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर कैट ने यह फैसला दिया। एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) नियम, 1954 के तहत प्रत्येक पांच वर्ष में कैडर रिव्यू किया जाना अनिवार्य है, लेकिन पिछले लगभग दो दशकों से इस प्रक्रिया में लगातार देरी की जा रही है।
याचिका में कहा गया कि कैडर रिव्यू में देरी के कारण राज्य पुलिस सेवा के अनेक पात्र अधिकारी पदोन्नति और आईपीएस कैडर में इंडक्शन के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रही, तो कई अधिकारी 56 वर्ष की आयु सीमा पार कर जाएंगे और उन्हें इंडक्शन का अवसर हमेशा के लिए खोना पड़ेगा। अधिवक्ता ने यह भी रेखांकित किया कि अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश के अधिकारी अत्यधिक पिछड़ गए हैं, जिससे गंभीर असमानता उत्पन्न हुई है।
कैट ने कहा, इस तरह की देरी से अधिकारियों के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत प्राप्त समानता और पदोन्नति के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं। ट्रिब्यूनल ने सरकारों की निष्क्रियता को अफसरों के भविष्य से खिलवाड़ बताया। (MP News)
Published on:
13 Jan 2026 05:55 am
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