5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान की अनुप्रिया का लंदन मैराथन में अनोखा अंदाज, देसी पोशाक में लगाई दौड़

विश्व की छह सबसे बड़ी मैराथन में से एक लंदन मैराथन में गुलाबी नगरी में रहने वाली अनुप्रिया व्यास ने अनोखे अंदाज में देश की संस्कृति के प्रति सम्मान प्रकट किया। विदेशी धरती पर पचास हजार से अधिक लोगों की इस मैराथन में अनुप्रिया ने राजस्थानी पारम्परिक पोशाक में हिस्सा लिया और मेडल जीता।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Kirti Verma

Apr 24, 2024

शीतल जे पालीवाल
Jaipur News : विश्व की छह सबसे बड़ी मैराथन में से एक लंदन मैराथन में गुलाबी नगरी में रहने वाली अनुप्रिया व्यास ने अनोखे अंदाज में देश की संस्कृति के प्रति सम्मान प्रकट किया। विदेशी धरती पर पचास हजार से अधिक लोगों की इस मैराथन में अनुप्रिया ने राजस्थानी पारम्परिक पोशाक में हिस्सा लिया और मेडल जीता। अनुप्रिया ने विश्व की इन सभी छह मैराथन में इसी पोशाक में दौडऩे का संकल्प लिया है।अब वह बर्लिन में सितम्बर में होने जा रही मैराथन में भी हिस्सा लेंगी, जहां वे एक बार फिर राजस्थानी पोशाक में दौड़ेंगी।

स्पोट्र्स ड्रेस के बजाय पोशाक
अनुप्रिया ने बताया कि वह 2007 में पढ़ाई के लिए यूके गई थीं। फिलहाल वह यूके की नेशनल हेल्थ सर्विस में साइकोलॉजिकल थेरेपिस्ट हैं। उनके मन में राजस्थान और यहां की संस्कृति बसती है।

लंदन मैराथन में हिस्सा लेने के लिए वे चार वर्ष से मेहनत कर रहीं है। हाल ही हुई मैराथन में उन्होंने महंगी स्पोट्र्स ड्रेसेस की बजाय राजस्थानी पोशाक को चुना। अनुप्रिया कहती हैं कि अपने इस काम से वह संस्कृति को प्रमोट करने के साथ-साथ उन महिलाओं के प्रति भी सम्मान व्यक्त करना चाहती हैं, जो दिन रात इसी पोशाक में काम करती हैं। उन्होंने कहा कि यह पोशाक बहुत ही आरामदायक है और मैराथन के लिए किसी प्रकार के दूसरे खर्चें की जरूरत नहीं है।

यह भी पढ़ें : राजस्थान की पहली मुस्लिम बेटी कर्नल पद पर पहुंचकर संभालेगी आरडनेंस आर्मी यूनिट कमांड, परिवार के कई सदस्य सेना में

अफ्रीकी ग्रुप ने भी पारम्परिक ड्रेस में आने का लिया निर्णय
अनुप्रिया ने बताया कि जब वह पचास हजार लोगों के बीच अपनी पारम्परिक पोशाक पहनकर दौड़ी, तो लोगों ने उत्साह से उनके साथ फोटो खिचवाईं व राजस्थानी संस्कृति के बारे में भी जाना। ऐसे में वहां पर एक अफ्रीकी ग्रुप ने उन्हें देखकर अगले वर्ष अपनी पारम्परिक ड्रेस में आने का निर्णय लिया। अनुप्रिया ने बताया कि कॅरियर के लिए कर्मभूमि दूसरी चुननी पड़ सकती हैं, लेकिन मातृभूमि के प्रति दायित्व को नहीं भूलना चाहिए। अपनी जड़ों से जुड़े रहना बहुत जरूरी है।