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राजस्थान में कैबिनेट मंत्री के काफिले की भिड़ी गाड़ी, जानें फिर क्या ‘गज़ब’ हुआ? 

दौसा पुलिस अब इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है। दोनों गाड़ियों को सुरक्षित स्थान पर खड़ा करवाया गया है और बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

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दौसा/बांदीकुई। जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे (NH-21) पर गुरुवार को राजस्थान सरकार के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत का काफिला एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया। घटना उस समय हुई जब मंत्री का स्वागत करने के लिए काफिला हाईवे के किनारे रुका था। इस दौरान काफिले की एस्कॉर्ट (पायलट) गाड़ी और जयपुर से उत्तर प्रदेश जा रही एक कार के बीच टक्कर हो गई। हालांकि, हादसे में किसी को गंभीर चोट नहीं आई है, लेकिन व्यस्त हाईवे पर इस तरह गाड़ियां खड़ी करने को लेकर सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, मंत्री जोराराम कुमावत जयपुर से सड़क मार्ग द्वारा बांदीकुई जा रहे थे। दौसा डेयरी के पास समर्थकों ने उनके स्वागत का कार्यक्रम रखा था। मंत्री के स्वागत के लिए जैसे ही काफिला रुका, सुरक्षा में लगी पायलट एस्कॉर्ट गाड़ी का गेट अचानक खुल गया। उसी वक्त एक कार उस खुले गेट से जा भिड़ी।

बड़ा हादसा टला: सुरक्षित हैं सभी सवार

जिस कार से एस्कॉर्ट गाड़ी की भिड़ंत हुई, उसमें रमेश सिंह और उनके साथी सवार थे। वे जयपुर से उत्तर प्रदेश जा रहे थे। टक्कर के कारण कार और सरकारी गाड़ी, दोनों पर हल्के स्क्रैच आए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर कार की रफ्तार और अधिक होती या भिड़ंत सीधी होती, तो यह एक बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था। राहत की बात यह रही कि मंत्री जोराराम कुमावत और कार सवार सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।

लापरवाही किसकी? हाईवे पर 'सुरक्षा' का सवाल

नेशनल हाईवे-21 राजस्थान के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है, जहाँ चौबीसों घंटे ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है। कार सवार रमेश सिंह ने बताया, "हम अपनी लेन में जा रहे थे। हाईवे किनारे खड़ी गाड़ी का गेट अचानक खुल गया जिससे हमारी कार टकरा गई। हमारा कोई दोष नहीं था, फिर भी पुलिस ने हमारी गाड़ी को कब्जे में ले लिया है।"

अब यह पुलिस जांच का विषय है कि क्या मंत्री का काफिला सुरक्षित दूरी पर खड़ा था? क्या सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए गेट खोला गया था?

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल !

हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने स्थिति को संभाला। मंत्री जोराराम कुमावत को दूसरी एस्कॉर्ट गाड़ी के जरिए झुपड़ीन गांव के लिए रवाना कर दिया गया। लेकिन विवाद तब बढ़ा जब पुलिस ने रमेश सिंह की कार को अपने कब्जे में ले लिया। यात्रियों का कहना है कि वे अपने गंतव्य के लिए लेट हो रहे हैं और मामूली स्क्रैच के बावजूद पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

दौसा पुलिस कर रही जांच

दौसा पुलिस अब इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सरकारी गाड़ी हाईवे की मुख्य सीमा के भीतर खड़ी थी या साइड में। फिलहाल दोनों गाड़ियों को सुरक्षित स्थान पर खड़ा करवाया गया है और यात्रियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।