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राजस्थान में ‘डॉग्स कंट्रोल’ करने पर हाई लेवल मीटिंग, CS और अफसरों ने बना लिया ये ‘एक्शन प्लान’     

आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और उनकी अनियंत्रित आबादी को लेकर प्रदेश सरकार ने अब 'आर-पार' की रणनीति तैयार कर ली है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद, एक ऐसी योजना को हरी झंडी दिखाई है जो न केवल कुत्तों की आबादी पर लगाम लगाएगी, बल्कि तकनीक के जरिए एक-एक कुत्ते की मॉनिटरिंग भी करेगी।

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Rajasthan CS directs integrated portal to control stray dogs in a high level meeting in Jaipur

जयपुर सहित पूरे राजस्थान में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और उनकी बढ़ती संख्या से परेशान जनता के लिए राहत की खबर है। सोमवार को शासन सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए एक 'एकीकृत डिजिटल पोर्टल' (Integrated Portal) विकसित करने के निर्देश दिए हैं। यह पोर्टल न केवल डेटा का संकलन करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि किस गली और मोहल्ले में कितने कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी (ABC) हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, एक्शन मोड में प्रशासन

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देश भर में आवारा कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण, नसबंदी और टीकाकरण को लेकर कड़े दिशा-निर्देश दिए थे। इसी की अनुपालना में राजस्थान सरकार ने अब एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) प्रोग्राम को युद्ध स्तर पर चलाने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि अब यह कार्य केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पोर्टल के जरिए इसकी वास्तविक समय (Real-time) मॉनिटरिंग की जाएगी।

'एकीकृत पोर्टल' से होगी जवाबदेही तय

अक्सर देखा गया है कि नगर निगम और स्थानीय निकाय कुत्तों की नसबंदी के नाम पर भारी बजट खर्च करते हैं, लेकिन धरातल पर नतीजे शून्य रहते हैं। मुख्य सचिव ने इस समस्या का समाधान 'टेक्नोलॉजी' में ढूंढा है।

  • डेटा संकलन: प्रदेश के हर जिले और वार्ड में आवारा कुत्तों की संख्या का सटीक डेटा पोर्टल पर होगा।
  • पारदर्शिता: नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों की जानकारी फोटो और लोकेशन के साथ पोर्टल पर अपडेट करनी होगी।
  • निगरानी: राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति सीधे इस पोर्टल के जरिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी।

नए ABC सेंटरों का बिछेगाजाल

मुख्य सचिव ने स्वायत्त शासन विभाग को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के उन हॉटस्पॉट्स (Hotspots) की पहचान की जाए जहाँ कुत्तों के हमले अधिक हो रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार नए एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पशु कल्याण संगठनों (NGOs) के साथ समन्वय बैठाकर टीकाकरण अभियान में तेजी लाई जाए।

राज्य और जिला स्तर पर बनेगी 'निगरानी समितियां'

कुत्तों के आतंक से निपटने के लिए अब एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है।

  • राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति: यह समिति पूरे प्रदेश की प्रगति की समीक्षा करेगी।
  • जिला स्तरीय बैठकें: जिला कलेक्टरों को पाबंद किया गया है कि वे हर महीने समयबद्ध बैठकें कर रिपोर्ट मुख्यालय को भेजें। जयपुर जिला कलेक्टर जितेन्द्र सोनी और नगर निगम आयुक्त गौरव सैनी को राजधानी जयपुर में इस मॉडल को सबसे पहले प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

जनता की भागीदारी ज़रूरी

सरकार का मानना है कि केवल सरकारी मशीनरी से यह समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा कि वे अपने क्षेत्र के आवारा कुत्तों के टीकाकरण की सूचना पोर्टल पर कैसे दें और हिंसक कुत्तों की रिपोर्ट कहाँ करें।