
जयपुर. दिल्ली रोड स्थित शराब की दुकान पर लोगों की भीड़। फोटो पत्रिका
Rajasthan New Excise Policy : राजस्थान में शराब को लेकर सरकार ने चुपचाप ऐसा फैसला कर दिया है, जो प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सामाजिक ताने-बाने और अपराध नियंत्रण की नीति पर सीधा असर डाल सकता है। आबकारी एवं मद्य-संयम नीति 2025–29 में संशोधन करते हुए सरकार ने शराब दुकानों के खुलने और बंद होने का समय तय करने का अधिकार सीधे आबकारी आयुक्त को सौंप दिया गया है। यह बदलाव सोची-समझी रणनीति के तहत देर रात तक शराब बिक्री का रास्ता खोलने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। यह नया प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।
आबकारी महकमा लंबे समय से शराब दुकानों का समय रात 8 बजे से बढ़ाकर रात 10 या 11 बजे तक बढ़ाने की पैरवी करता रहा है। अब जब समय निर्धारण का पूरा अधिकार उनके हाथ में है, तो सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार भविष्य में राजनीतिक जवाबदेही से बचते हुए अफसरों के जरिए शराब बिक्री का समय बढ़वाना चाहती है? जबकि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने बढ़ते अपराध, महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को देखते हुए शराब दुकानों का समय रात 11 बजे से घटाकर रात 8 बजे कर दिया था। तब पुलिस और प्रशासन का तर्क था कि देर रात शराब बिक्री अपराधों को बढ़ावा देती है। अब उसी फैसले को अप्रत्यक्ष रूप से पलटने की जमीन तैयार की जा रही है।
कुंभलगढ़ और रणकपुर जैसे सीमित पर्यटक आवागमन वाले क्षेत्रों में बार लाइसेंस शुल्क तीन गुना बढ़ा दिया गया है। स्थानीय होटल व्यवसायियों का कहना है कि यहां पर्यटन साप्ताहिक और सीजनल है, ऐसे में इतनी अधिक फीस अव्यावहारिक है और इससे व्यवसाय प्रभावित होगा।
नीति में किया गया एक और बदलाव सीधे तौर पर आम परिवारों पर प्रहार माना जा रहा है। विभाग से रजिस्टर्ड स्थानों पर शादी, रिसेप्शन या अन्य सामाजिक आयोजनों में शराब परोसने के लिए लिए जाने वाले एक दिवसीय लाइसेंस की फीस को 12 हजार रुपए से बढ़ाकर 20 हजार रुपए प्रतिदिन कर दिया गया है। वहीं घर पर पार्टी के लिए भी अब लाइसेंस लेने पर ज्यादा शुल्क देना होगी।
नीति संशोधन का दूसरा बड़ा फैसला शराब दुकानों के नवीनीकरण से जुड़ा है। वर्ष 2025–26 की वार्षिक गारंटी राशि को 12.5 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2026–27 के लिए तय किया गया है। दुकान पूरे वर्ष चली हो या आंशिक अवधि के लिए, हर स्थिति में बढ़ी हुई गारंटी राशि लागू होगी।
क्लस्टर सिस्टम में भी यही व्यवस्था रहेगी। सरकार भले ही इसे राजस्व बढ़ाने का कदम बता रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इसका बोझ अंततः आम उपभोक्ता पर पड़ेगा, क्योंकि कारोबारी बढ़ी हुई लागत की भरपाई शराब के दामों से करेंगे।
1- देशी मदिरा और राजस्थान निर्मित मदिरा की न्यूनतम 3 प्रतिशत आपूर्ति एसेप्टिक ब्रिक पैक में अनिवार्य की गई है, जिसे भविष्य में 5 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकेगा।
2- होटल, रेस्टोरेंट, क्लब बार में सूक्ष्म मदिरा निर्माण इकाई पर पहले दो माह 50 प्रतिशत आबकारी शुल्क में छूट।
3- हेरिटेज व अन्य होटलों के लाइसेंस शुल्क का पुनर्निर्धारण क्षेत्रफल, कमरों की संख्या के आधार पर किया गया।
4- अवसर विशेष लाइसेंस के दुरुपयोग पर लाइसेंस निरस्तीकरण और 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
Updated on:
29 Jan 2026 08:00 am
Published on:
29 Jan 2026 07:54 am
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