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Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बचपन की गलती से अब नहीं जाएगी नौकरी

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा नाबालिग रहते हुए छोटे अपराध के आधार पर सरकारी नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। हनुमानगढ़ के दिव्यांग सफाई कर्मचारी की बर्खास्तगी रद्द की।

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जयपुर

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Ankit Sai

Jan 16, 2026

Rajasthan High Court

Rajasthan High Court फोटो-पत्रिका

जयुपर: राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा अगर किसी ने बचपन में (नाबालिग रहते हुए) कोई गलती या छोटा अपराध किया था, तो उस आधार पर उसे सरकारी नौकरी से निकाला नहीं जा सकता। ऐसे मामले में नौकरी से बर्खास्तगी गलत है।

नाबालिग पर 4 आपराधिक मामले थे

Rajasthan High Court; यह फैसला हनुमानगढ़ जिले के एक दिव्यांग सफाई कर्मचारी श्रवण के मामले में आया है। श्रवण को रावतसर नगरपालिका में सफाई कर्मचारी की नौकरी मिली थी। वह 70% दिव्यांग (बौनापन) है। नौकरी मिलने के बाद पुलिस जांच में पता चला कि उसके खिलाफ पुराने 4 आपराधिक मामले थे। इनमें से 3 मामलों में जुआ एक्ट के तहत सजा हुई थी और एक आबकारी मामले में वह बरी हो गया था। नगरपालिका ने इसी वजह से अगस्त 2018 में उसकी नौकरी खत्म कर दी।

श्रवण ने हाईकोर्ट में अपील की। उसके वकील ने कहा कि ये सभी घटनाएं तब हुईं जब श्रवण नाबालिग था। ये छोटे मामले थे। सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ फैसले का हवाला देते हुए एडवोकेट खत्री ने तर्क दिया कि तुच्छ अपराधों को छिपाना अपने आप में उम्मीदवारी खारिज करने का आधार नहीं हो सकता। वकील ने कहा पद की प्रकृति (सफाई कर्मचारी) को देखते हुए नियोक्ता को विवेकाधिकार का प्रयोग करते हुए पुरानी गलतियों को नजरअंदाज करना चाहिए था।

JJ Act देता है सुरक्षा

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह ने इस अपील को मंजूर कर लिया। कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट जेजे एक्ट (JJ Act)की धारा 19 का जिक्र किया। इस धारा के मुताबिक, अगर कोई किशोर (नाबालिग) अपराध करता है और उसके खिलाफ जेजे एक्ट के तहत कार्रवाई होती है, तो भविष्य में उसे किसी भी तरह की अयोग्यता या सजा नहीं मिलनी चाहिए।

कोर्ट ने दिए नियुक्ति के निर्देश

कोर्ट ने साफ कहा कि अपराध के समय श्रवण नाबालिग था और सफाई कर्मचारी जैसे पद को देखते हुए उसे इस सुरक्षा का फायदा मिलना चाहिए। इसलिए उसकी बर्खास्तगी रद्द कर दी गई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सफाई कर्मचारी की नियुक्ति बहाल की जाए और उसे निरंतर सेवा में माना जाए।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस समय वह नौकरी से बाहर था, उस दौरान का असली वेतन नहीं मिलेगा। लेकिन कागजी तौर पर उसकी सेवा लगातार मानी जाएगी, ताकि सीनियरिटी, पेंशन आदि लाभ प्रभावित न हों। यानी उसे नोशनल लाभ (कागजी फायदा) मिलेगा, न कि नकद पैसे। यह फैसला उन लोगों के लिए राहत की बात है जिनके बचपन की छोटी गलतियां अब उनकी नौकरी में रुकावट बन रही थीं।