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Rajasthan News : हैरान कर रही ‘स्कूल शिक्षा’ की लेटेस्ट रैंकिंग, जयपुर-जोधपुर नहीं… इन ज़िलों ने गाड़े सफलता के झंडे

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने अपनी क्रांतिकारी 'जिला एकेडमिक रैंकिंग' के ताजा आंकड़े जारी कर दिए हैं। जनवरी 2026 की इस रिपोर्ट ने प्रदेश के शैक्षणिक परिदृश्य की एक स्पष्ट तस्वीर पेश की है, जिसमें शेखावाटी के जिलों का दबदबा एक बार फिर कायम रहा है।

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राजस्थान में स्कूल शिक्षा के स्तर को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में 'डेटा-आधारित समीक्षा' (Data-driven Review) एक गेम चेंजर साबित हो रही है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी जनवरी-2026 की जिला एकेडमिक रैंकिंग में झुंझुनूं और हनुमानगढ़ संयुक्त रूप से प्रदेश के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जिले बनकर उभरे हैं। इस बार की रैंकिंग की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि छात्रों के 'सीखने के प्रतिफल' (Learning Outcomes) को मुख्य आधार बनाया गया है।

शेखावाटी और उत्तर राजस्थान का दबदबा

ताजा रैंकिंग के अनुसार, जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Healthy Competition) देखने को मिल रही है।

टॉप-2 जिले: झुंझुनूं और हनुमानगढ़ ने अपने उत्कृष्ट शैक्षणिक रिकॉर्ड को बरकरार रखते हुए पहला और दूसरा स्थान हासिल किया है।

चूरू का उदय: चूरू जिले ने इस महीने जबरदस्त सुधार दिखाते हुए तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया है। चूरू ने इस रेस में श्रीगंगानगर को पीछे छोड़ दिया है।

अन्य अग्रणी जिले: सीकर चौथे, भरतपुर पांचवें और खैरतल-तिजारा छठे स्थान पर रहे हैं।

निचले पायदान पर कौन? सुधार की दरकार

जहाँ उत्तर राजस्थान के जिले टॉप पर हैं, वहीं दक्षिण और पश्चिम राजस्थान के कुछ जिलों को अभी लंबा सफर तय करना है। रैंकिंग के अनुसार, बांसवाड़ा और जैसलमेर वर्तमान में सबसे निचले पायदान पर हैं। विभाग इन जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना और लक्षित सहयोग (Targeted Support) प्रदान करने की तैयारी कर रहा है।

इन मानकों पर तय होती है जिलों की किस्मत

शिक्षा विभाग की यह रैंकिंग केवल बोर्ड परीक्षा के अंकों तक सीमित नहीं है। इसमें कई आधुनिक और गवर्नेंस संबंधी संकेतकों को शामिल किया गया है:

छात्रों की उपस्थिति: नियमित उपस्थिति और ड्रॉप-आउट रेट में कमी।

टीचिंग क्वालिटी: शिक्षकों द्वारा कक्षा में अपनाए जा रहे नवाचार।

फील्ड विजिट: उच्चाधिकारियों द्वारा स्कूलों की कितनी बार और कितनी प्रभावी मॉनिटरिंग की गई।

कॉम्पिटेंसी-बेस्ड असेसमेंट (CBA): छात्र रटने के बजाय कितना समझ रहे हैं।

ओरल रीडिंग फ्लुएंसी (ORF): छात्रों की पढ़ने और समझने की गति का मूल्यांकन।

'जवाबदेही ही सफलता की कुंजी'

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस रैंकिंग प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जिला रैंकिंग ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है।

उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर स्तर पर लिए गए निर्णय विद्यार्थियों की वास्तविक प्रगति के आधार पर हों। प्रदेश का कोई भी बच्चा, चाहे वह जैसलमेर में हो या झुंझुनूं में, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।"

तकनीक और नवाचार पर जोर : कृष्ण कुणाल
शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि शिक्षा विभाग अब डेटा-आधारित समीक्षा बैठकों के जरिए कमियों की पहचान कर रहा है। हर महीने होने वाली इन समीक्षा बैठकों में कम स्कोर वाले जिलों के अधिकारियों के साथ 'वन-टू-वन' संवाद किया जाता है और सुधार के लिए स्पष्ट लक्ष्य (Next Steps) तय किए जाते हैं। आने वाले समय में तकनीक, शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल नवाचारों को और अधिक प्राथमिकता दी जाएगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह रैंकिंग?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रैंकिंग प्रणाली जिलों के बीच एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा पैदा करती है। जब एक जिला पिछड़ता है, तो वहां का प्रशासनिक अमला सुधार के लिए सक्रिय होता है। इससे न केवल भौतिक संसाधन (जैसे स्कूल भवन, टॉयलेट आदि) सुधरते हैं, बल्कि सीधे तौर पर छात्रों के मानसिक विकास और परीक्षा परिणामों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।