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सरकार जिले में उद्योग लगाएं तो किसानों की माली हालात सुधार सकता है लहसुन

- मसाला फसल के लिए अनुकूल है जिले की जलवायु

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झालावाड़ पिछले दशकों में झालावाड़ जिला कृषि खाद्यान्न एवं तिलहन उत्पादन तक ही सीमित था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कृषि फसल विविधता की ओर कृषकों का रुझान बड़ा है। इससे खेती के स्वरूप में धीरे-धीरे परिवर्तन देखने काे मिल रहा है। पहले जहां खाद्यान्न, तिलहन फसलों का उत्पादन किया जाता था। आज यहां व्यापारिक मसाला फसलों का उत्पादन भी हो रहा है। इसका प्रमुख कारण जिले की जलवायु मसाला फसल उत्पादन की दृष्टि से अनुकूल है। जो इसके उत्पादन एवं क्षेत्रफल में निरन्तर वृद्धि कर रही है। लहसुन फसल आर्थिक दृष्टि से कृषकों की स्थिति मजबूत करने में रीड़ की हड्डी साबित हुआ है। जिले में मुख्य रूप से उद्यानिकी फसलों के अन्तर्गत लहसुन, धनिया की खेती प्रमुख रूप से की जाती है। ऐसे में सरकार लहसुन के लिए प्रोसेसिंग इकाई खोलने की घोषणा आगामी बजट में करें तो किसानों को राहत मिल सकती है।

इसमें होता है उपयोग-

लहसुन का मुख्य उपयोग मसालों में किया जाता है। लहसुन की कलियां, पेस्ट एवं पाउडर का उपयोग सब्जियों, पापड़, दवाइयां आदि बनाने में किया जाता है। अभी जिले में एक भी प्रोसेसिंग प्लांट नहीं है। जिले में क्षेत्र व उत्पादकता के आधार पर मंडियों की स्थापना, प्रसंस्करण इकाई में ग्रेडिंग, ग्राइंडिंग, पैकेजिंग आदि की स्थापना हो जाए तो जिले में मसाला आधारित प्रसंस्करण को सशक्त बनाया जा सकेगा।जिले में उत्पादित होने वाले लहसुन की अधिकतर फसल ग्रेडिंग करके बाहर के बाजार में भेजी जाती है। इसमें देश के तमिलनाडू, कर्नाटक, बिहार, उत्तरप्रदेश, असम, दिल्ली तथा राजस्थान के विभिन्न जिलों समेत दिल्ली और वहां से विदेशों मुख्यत: खाड़ी देशों में भी भिजवाया जाता है।

जिले में प्रोसेसिंग यूनिटों की दरकार-

झालावाड़ जिला बड़ी संख्या में लहसुन उत्पादक जिला है। लेकिन यहां से ज्यादातर लहसुन की फसल को बाहर बिक्री के लिए भेजा जाता है। यहां खानपुर व मनोहरथाना मंडियों में वर्ष पर्यन्त लहसुन की आवक होती है। सीजन में लहसुन की बम्पर आवक रहती है। लेकिन यहां लहसुन प्रोडक्ट बनाने की कोई यूनिटें स्थापित नहीं होने से व्यापारी व बड़े किसान दोहरा लाभ नहीं ले पाते हैं। ऐसे में सरकार को बजट घोषणा में यहां लहसुन प्रोसेसिंग यूनिट की घोषणा करनी चाहिए।

दवाई के रूप में होता है प्रयोग-

किसान हरकचन्द दांगी ने बताया कि लहसुन की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही है। दाम बढ़ने से किसान बपर खेती कर रहे हैं। लहसुन और प्याज नकदी फसल हैं। इनका प्रयोग मसाले के रूप में किया जाता है। लहसुन का प्रयोग पेट संबंधी बीमारियों की दवा बनाने में भी किया जाता है। अक्टूबर में इसकी बुआई कर दी गई है। मार्च अप्रेल में फसल तैयार हो जाती है।

बड़े पैमाने पर बुवाई

जिले में इस बार बड़े पैमाने पर नकदी फसल लहसुन की बुवाई हुई है। जिले में सुनेल, खानपुर, असनावर, झालरापाटन, बकानी, पिड़ावा व भवानीमंडी सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लहसुन की खेती की जा रही है। यहां का लहसुन मध्यप्रदेश समेत देश के कई राज्यों में जाता है।

किसानों को करना होगा ऑनलाइन आवेदन-

इस योजना का लाभ लेने के लिए कोई भी किसान इकाई स्थापित कर विभाग को अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। उद्यान विभाग की ओर से किसानों को फार्म पैक हाउस, कोल्ड स्टोरेज बनाने पर 50 प्रतिशत, इंटीग्रेटेड पैक हाउस के निर्माण पर सामान्य किसानों को 35 प्रतिशत प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड बैंक सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। यह सही है कि झालावाड़ जिले की जलवायु लहसुनउत्पादन के लिए अनुकूल है, अगर यहां लहसुन संबंधी यूनिट स्थापित होती है तो किसानों को इसका फायदा मिलेगा। प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए सरकार 35 लाख से अधिक का अनुदान देती है।

सुभाष शर्मा, उप निदेशक उद्यान विभाग, झालावाड़