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Rakesh Bishnoi Suicide: डाॅ. राकेश बिश्नोई सुसाइड केस, राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया ऐसा बड़ा आदेश

पीजी छात्र डॉ. राकेश बिश्नोई की मौत के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पुलिस जांच को एसीपी स्तर की कड़ी निगरानी में जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

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फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में पीजी छात्र डॉ. राकेश बिश्नोई की मौत से जुड़े मामले में पुलिस जांच को एसीपी स्तर की कड़ी निगरानी में जारी रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी पक्षपात के होनी चाहिए, ताकि मौत की परिस्थितियों को लेकर उठे संदेह दूर किए जा सकें।

'मौत के तरीके पर गंभीर सवाल'

न्यायाधीश फरजंद अली की एकल पीठ ने मामले की केस डायरी देखने और संबंधित पुलिस अधिकारी से बातचीत के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया यह एक दुखद घटना प्रतीत होती है, जिसमें एक युवक के आत्महत्या किए जाने की बात सामने आती है, लेकिन शिकायतकर्ता की ओर से बताए गए हालात मौत के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजय बिश्नोई ने दलीलें प्रस्तुत कीं।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने पहले जांच कर आत्महत्या का मामला मानते हुए दुष्प्रेरण के आरोपों को प्रमाणित नहीं माना था, लेकिन यह रिपोर्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं की गई। इसके बजाय रिपोर्ट वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भेजी गई, जिस पर डीसीपी (पश्चिम) ने चार बिंदुओं पर आगे की जांच के निर्देश दिए थे। इनमें एफएसएल रिपोर्ट से मौत के कारण को स्पष्ट करना, कॉलेज रिकॉर्ड में किसी शिकायत की जांच, छात्र के शैक्षणिक प्रदर्शन और संभावित उत्पीड़न की पड़ताल तथा उपचार के लिए जयपुर भेजे जाने के कारणों की जांच शामिल है।

आगे की जांच जारी

पीठ ने पाया कि फिलहाल इन बिंदुओं पर आगे की जांच जारी है और यही जांच मौजूदा जांच अधिकारी द्वारा की जा रही है। हालांकि, जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इसे संबंधित क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त की निरंतर निगरानी में रखने के निर्देश दिए गए हैं। एसीपी को केस डायरी और जांच की प्रगति पर लगातार नजर रखने तथा आवश्यक कानूनी निर्देश देने का अधिकार दिया गया है। कोर्ट ने निदेशक, एफएसएल को भी निर्देश दिए हैं कि विसरा की जांच शीघ्र पूरी कर 15 दिन के भीतर रिपोर्ट पुलिस आयुक्त, जोधपुर को भेजी जाए। साथ ही यह अपेक्षा जताई गई है कि पूरी जांच दो माह के भीतर पूरी कर संबंधित अदालत में रिपोर्ट पेश की जाए।