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पत्रिका फागोत्सव : सूर्यनगरी के गांधी मैदान में उतरा वृंदावन, भक्ति में डूबा जोधपुर

'पत्रिका फागोत्सव' में निखरे श्रद्धा, भक्ति और लोकसंस्कृति के रंग, भावपूर्ण भजनों ने श्रद्धालुओं को किया भक्ति रस में सराबोर

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कार्यक्रम में झूमतीं महिलाएं। फोटो- पत्रिका

जोधपुर। फाल्गुन मास की आध्यात्मिक सुगंध और बसंत ऋतु की बयार के बीच राजस्थान पत्रिका की ओर से आयोजित ‘पत्रिका फागोत्सव’ सोमवार को सरदारपुरा स्थित खचाखच भरे गांधी मैदान में भव्य, भक्तिमय और रंगारंग वातावरण में संपन्न हुआ।

श्रद्धा, संगीत और लोकसंस्कृति के अनुपम संगम से ओतप्रोत इस कार्यक्रम में गोवत्स राधा-कृष्ण महाराज की ओर से प्रस्तुत भावपूर्ण भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उनके सुमधुर कंठ से निकले फाग, होली और कृष्ण भक्ति से ओतप्रोत भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और वातावरण वृंदावनमय हो गया।

राजस्थान पत्रिका के संपादक संदीप पुरोहित ने कहा कि पत्रिका फागोत्सव आयोजन का प्रमुख उद्देश्य भारतीय लोक परंपराओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना है। सत्संग भवन ट्रस्ट व कुंज महोत्सव आयोजन समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों ने अतिथियों एवं संतों का स्वागत किया।

लोक वाद्यों की मधुर थाप पर झूमे श्रद्धालु

पारंपरिक भक्तिमय मारवाड़ी होरिया, चंग, तबला, झांझ, ढोल-नगाड़ों सहित अन्य लोक वाद्यों की मधुर थाप पर प्रस्तुत भक्ति गीतों ने कार्यक्रम स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं को झूमने पर विवश कर दिया।

मैं ना ना करते हार गई रंगडार गयो सांवरिया…

गोवत्स राधा-कृष्ण महाराज ने पत्रिका फागोत्सव कार्यक्रम का आगाज ‘झोली को भर लो भक्तों रंग गुलाल से, होली खेलांगा आपां गिरधर गोपाल से…’ गीत से किया, जिससे समूचा माहौल वृंदावनमय हो उठा। ‘रे महीनो फागण रो सांवरिया थ्हारी आळूं आवै रे…’, ‘सांवरियो है सेठ म्हारी राधाजी सेठानी है…’, ‘मोहन आओ तो सही…’, ‘माधव रे मंदिर में मीराबाई एकली खड़ी…’ जैसे आध्यात्मिकता से ओतप्रोत भजनों ने शहरवासियों को आध्यात्मिक अनुभूति कराई।

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कार्यक्रम में ‘मैं ना ना करते हार गई रंगडार गयो सांवरिया…’, ‘रंग भर कैसे होली खेलूं रे ईन सांवरिया रे संग…’, ‘कान्हा मत मारे पिचकारी, मेरे घर सास लड़ेगी रे…’ की प्रस्तुतियों ने फागोत्सव को नई ऊंचाइयां दीं। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण प्रमुख संतों के सान्निध्य में ठाकुरजी संग पुष्प होरी रहा। ‘फूलां री होळी खेलो रे सांवरिया, वृंदावन रो रंग लाग्यो’, ‘आज ब्रज में होरी रे रसिया’ और ‘श्याम पधारो फागुन आयो’ जैसे भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु स्वतः ही झूम उठे।