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शहादत को सलाम: शहीद प्रभु सिंह के घर जाने के लिए एक दशक बाद भी नहीं बनी सड़क, बेटी बनना चाहती है आर्मी ऑफिसर

Shahadat Ko Salam: जोधपुर में शेरगढ़ क्षेत्र के खिरजां खास गांव निवासी शहीद प्रभु सिंह राठौड़ ने 22 नवंबर 2016 को माछिल सेक्टर में देश की रक्षा करते हुए शहादत दी। 13 राजपूताना राइफल्स के जवान प्रभु सिंह की वीरता के लिए आज भी सेना मेडल का इंतजार है।

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Shahadat Ko Salam

राजस्थान पत्रिका की ओर से सम्मान करते हुए (फोटो- पत्रिका)

Shahadat Ko Salam: बेलवा/जोधपुर: वीर प्रसूताओं की धरा शेरगढ़ में जन्मे हर एक बच्चे को सेना में जाकर देश सेवा करने के घर से ही संस्कार दिए जाते हैं। ऐसा ही जज्बा खिरजां खास गांव में जन्मे जाबांज प्रभु सिंह राठौड़ के जहन में भी था।
बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी कर 20 वर्ष की आयु में वर्ष 2011 में भारतीय सेना की 13वीं राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए।

नवंबर 2016 में प्रभु सिंह राठौड़ सैन्य यूनिट के साथ माछिल सेक्टर में तैनात किए गए, जो पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ लगातार ऑपरेशन में लगी हुई थी।

22 नवंबर 2016 को प्रभु सिंह राठौड़ ने अंतिम सांस तक मातृभूमि की रक्षार्थ सरहद पर लड़ते रहे। राष्ट्र रक्षार्थ कर्तव्य पालन करते हुए प्रभु सिंह ने अपने जन्मदिवस से एक दिन पहले पच्चीस वर्ष की उम्र में शहीद हो गए।

राठौड़ के शौर्य की कहानी बताते हुए भारतीय सेना की 6वीं राजरिफ से रिटायर्ड उनके पिताजी चंद्र सिंह राठौड़ आज भी भावुक हो जाते हैं। करीब एक दशक पूर्व राठौड़ के शहादत की कहानी शेरगढ़ के गांव-गांव के जर्रे-जर्रे में है।

वीर शहीद प्रभु सिंह राठौड़ को खेलों से बहुत प्यार था। अब उनकी शहादत दिवस के दिन आयोजित प्रतियोगिता में शेरगढ़ के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। शहीद प्रभु सिंह राठौड़ के नाम पर राजस्व गांव और सरकारी विद्यालय है।

सेना मेडल का इंतजार

वीर शहीद प्रभु सिंह राठौड़ की असाधारण वीरता और साहस के लिए भारतीय सेना की ओर से मरणोपरांत सेना मेडल का इंतजार आज भी है। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि राठौड़ की कुर्बानी की बदौलत उन्हें सेना मेडल सम्मान मरणोपरांत से नवाजा जाना चाहिए। शहीद के घर जाने के लिए करीब एक दशक बाद भी पक्की रोड नहीं बन पाई है।

बर्थडे से एक दिन पहले सांसें कुर्बान

शहीद के पिता सेना से रिटायर्ड चंद्र सिंह बताते हैं कि प्रभु को छुट्टी काटकर वापस गए कुछ ही दिन हुए थे। शहादत से कुछ घंटे पहले ही उनसे दूरभाष पर बातचीत हुई। हम सबको फौजी के जन्मदिवस का इंतजार था। लेकिन जन्मदिवस पर तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह हेलीकॉप्टर से सेतरावा कस्बे के पास हेलीपैड पहुंची। जहां से हजारों के काफिले के साथ वीर जवान को पैतृक गांव खिरजां खास में अंतिम सलामी दी गई। जहां आज शहीद का स्मारक बना हुआ है।

पत्रिका की ओर से सम्मान

राजस्थान पत्रिका के शहादत को सम्मान कार्यक्रम के तहत जोधपुर कार्यालय द्वारा वीर शहीद के परिवार का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में श्री आईनाथ एजुकेशन संस्था के डायरेक्टर गोपाल सिंह भाटी ने शहीद के पिता चंद्र सिंह राठौड़, वीरांगना ओम कंवर, बहन, पुत्रियों पलक और गीता का सम्मान किया। गोपाल सिंह भाटी ने वीर शहीद परिजनों के सम्मान के लिए पत्रिका पहल की सराहना की।

पुत्री पलक को आर्मी ऑफिसर की चाह

पत्रिका से बातचीत में शहीद राठौड़ की बड़ी पुत्री पलक ने बताया कि भारतीय सेना में ऑफिसर बनकर देश सेवा करेगी। पलक ने बताया कि वो अपने पिता के बलिदान का देश के दुश्मनों से लड़कर बदला लेगी। कक्षा 5वीं में पढ़ रही पलक बताती हैं कि वो अपने पिता और दादा की तरह मातृभूमि की रक्षा करेगी। छोटी पुत्री गीता कक्षा दूसरी में पढ़ रही है।

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