
Police reel
कटनी. जिले में हत्या, चोरी, लूट, डकैती, रेप, गैंगरेप, अपहरण जैसे बढ़ते संगीन अपराध पुलिस की चौकसी पर एक ओर जहां सवाल खड़े कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पुलिस की मनमाफिक कार्यप्रणाली इन दिनों सुर्खियों में है। थाना प्रभारियों से लेकर चौकी प्रभारी व निचला स्टॉफ सामुदायिक पुलिसिंग को छोडकऱ सब कुछ कर रही है। इन दिनों कटनी की पुलिस रियल की बजाय रील पर ज्यादा भरोसा कर रही है। स्थिति यहां तक आ बनी है कि पुलिस अब अपनी छवि को सुधारने व महिमा मंडन के लिए रीलबाजों का सहारा ले रही है। पुलिस की बैठकों से लेकर आयोजनों, घटना व कार्रवाई में रीलबाज पहले नजर आते हैं। बकायता ये रील क्रियेटर पुलिस अफसरों की कार में तफरी कर पुलिस के साथ खुद की रील बनाते हैं और फिर सोशल मीडिया में तीस मार साबित करते हैं। खाकी पर चढ़े रील के चस्के का जिक्र जब अपराध समीक्षा करने पहुंचे डीइआजी को मीडिया के सवालों से हुआ तो वे भी मामले की जांच कराने की बात कहते हुए सोशल मीडिया ट्रेंड्स का जमाना बताया।
इन दिनों सबसे ज्यादा रील यातायात पुलिस की बन रही है। रील क्रियेटर द्वारा पुलिस के छपासरोग वाले कार्यक्रम, रैली और निजी संस्थानों में हो रहे आयोजनों को बढ़ा-चढ़ाकर सोशल मीडिया में पेश किया जा रहा है, ताकि तनता को लगे की पुलिस बहुत सक्रिय है। हकीकत तो यह है कि यातायात पुलिस मूल काम शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने का छोडकऱ शहर के आउटर में या फिर कुछ प्वाइंटों में औपचारिकता निभाती दिख रही है। थाना प्रभारी राहुल पांडेय भी काला चश्मा लगाकर रील बनवाने के खासे शौंकीन हो चले हैं। पूर्व में विधायक ने तो यहां तक कहा दिया था ट्रैफिक टीआई शहर में दिखते ही नहीं।
आधुनिक युग में लोग हर मूमेंट्स को रील से बयां कर रहे हैं। कुछ इसी प्रकार कटनी जिले की पुलिस भी हो गई है। मैदानी स्तर पर भले ही उनकी सक्रियता, त्वरित कार्रवाई, अपराधियों पर शिकंजा न दिखे, लेकिन रील में अपने आप को एकदम रियल बता रहे हैं। यह चस्का जिला पुलिस महकमा के बड़े अधिकारियों से लेकर छुटभैयों में खूब पनपा है। लोगों का कहना है कि रील बनाने का ट्रेंड बुरा नहीं, लेकिन रियल पुलिंगस के साथ हो तो बात सही हो।
मीडिया ने जब डीआइजी से सवाल किया कि पिछले साल पुलिस द्वारा बनाई जाने वाली रील पर प्रतिबंध लगाया गया है तो इस पर डीआइजी ने कहा कि यह सोशल ट्रेंड्स हैं। कोई भी रील का मामला सामने आने पर निर्देश जारी होते हैं। जब मीडिया ने सवाल किया कि कटनी में पुलिस ने रील बनाने के लिए एक युवक को हायर किये हुए हैं, बकायदा पुलिस कार में लेकर चलती है तो इस सवाल पर डीआइजी ने कहा कि यदि कोई ऐसा मामला है तो इसको दिखवाया जाएगा। बीच में रील बनाने का ट्रेंड था, जिसमें सभी लोग जुड़े थे। पुलिस मुख्यालय से जो निर्देश जारी हुए हैं उनका पालन कराया जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक द्वारा कुछ माह पहले नगर पुलिस अधीक्षक की निगरानी में आने वाले एनकेजे थाने को काटकर डीएसपी हेडक्वार्टर के पास कर दिया गया है। जो कई माह से चर्चाओं में हैं। इसके अलावा यातायात थाना की भी निगरानी सीएसपी के पास न होने का मुद्दा चर्चाओं में है। थाने की कटौती के सवाल पर डीआइजी अतुल सिंह ने कहा कि व्यक्तिगत मामले में मैं कोई कमेंट नहीं करूंगा। उन्होंने कहा कि यदि जिले का कोई विशेष मामला है तो फिर इसमें एसपी से चर्चा की जाएगी।
पुलिस कंट्रोल रूम में शनिवार को पुलिस उप महानिरीक्षक जबलपुर रेंज अतुल सिंह ने अपराध समीक्षा बैठक ली। बैठक में पुलिस अधीक्षक कटनी अभिनय विश्वकर्मा, एएसपी संतोष डेहरिया सहित जिले के समस्त एसडीओपी, थाना एवं चौकी प्रभारी उपस्थित रहे। अपराध समीक्षा के दौरान डीआईजी ने लंबित अपराधों, शिकायतों, मर्ग प्रकरणों, फरार एवं वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी, जमानत निरस्तीकरण, लघु अधिनियमों के तहत दर्ज प्रकरणों की गहन समीक्षा की। अवैध गौवंश परिवहन, अवैध हथियार, जुआ-सट्टा और शराब तस्करी जैसे अपराधों पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही के निर्देश दिए। डीआइजी ने प्रत्येक गंभीर एवं लंबित अपराध की फाइल को एक-एक कर देखा और जिन मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी शेष है, उनमें संबंधित एसडीओपी एवं थाना प्रभारियों से जवाब तलब करते हुए शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अपराध समीक्षा बैठक के बाद डीआइजी अतुल सिंह ने पुलिस कंट्रोल रूम में स्थापित सीसीटीवी मॉनिटरिंग सिस्टम एवं साइबर सेल कार्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने लाइव मॉनिटरिंग व्यवस्था, तकनीकी संसाधनों एवं साइबर अपराधों के निराकरण की कार्यप्रणाली की जानकारी ली और पुलिस द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की।
माधवनगर थाना से चंद कदमों की दूरी पर एटीएम चोरी के मामले में अबतक मुख्य आरोपी न मिलने, रुपयों की बरामदगी न होने के मामले में डीइआजी ने कहा कि इस मामले की निगरानी स्टेट हेड क्वार्टर से हो रही है। हर सप्ताह इस संबंध में चल रही जांच के बारे में पुलिस मुख्यालय को अवगत कराते हैं। टीमें अभी लगातार जांच कर रही हैं। आरोपी चिन्हित हो गए हैं। पुलिस की रडार में हैं। शीघ्र ही पकड़े जाएंगे।
Published on:
01 Feb 2026 08:55 am
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