
UP News: मुख्यमंत्री योगी के समर्थन में इस्तीफा देने के बाद फुट फूट कर रोने वाले अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गए हैं। उन पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप है। इस मामले में चल रही विभागीय जांच अब अंतिम चरण में बताई जा रही है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
जीएसटी अधिकारी प्रशान्त कुमार सिंह के मऊ जिले के निवासी हैं इनके सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह स्वयं इस प्रकरण के शिकायतकर्ता हैं। उन्होंने अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि उनके छोटे भाई ने गलत तथ्यों के आधार पर दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाया और उसी के सहारे सरकारी सेवा में नियुक्ति प्राप्त की।
जांच के दौरान एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि प्रशांत कुमार सिंह बार-बार बुलाए जाने के बावजूद मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश नहीं हो रहे हैं। मेडिकल परीक्षण के लिए उन्हें कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई ठोस सहयोग नहीं किया गया है। इसे जांच में जानबूझकर देरी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
इस संबंध में मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) द्वारा 19 दिसंबर 2025 को महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं को एक पत्र लिखा गया था। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि निर्धारित तिथि पर मेडिकल बोर्ड के समक्ष प्रशांत कुमार सिंह उपस्थित नहीं हुए। इस पत्र को जांच का महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले प्रशांत कुमार सिंह योगी आदित्यनाथ के कथित अपमान के मुद्दे पर भावुक होकर इस्तीफे की पेशकश को लेकर भी चर्चा में आए थे। अब फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का मामला सामने आने के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोप सही पाए गए, तो प्रशांत कुमार सिंह पर कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई संभव है।
आपको बता दें कि इससे पूर्व मंगलवार, 27 जनवरी को अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा था कि ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर की गई ‘औरंगजेब’ से जुड़ी टिप्पणी से वे गहराई से आहत हैं। उनका कहना था कि बीते तीन दिनों से वह इस बयान के कारण मानसिक तनाव में हैं।
प्रशांत कुमार सिंह ने स्पष्ट किया था कि प्रदेश की जनता द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री और राज्य के मुखिया के प्रति किसी भी प्रकार का अपमान वह स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी होने के नाते उनके आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचाने वाली है। इसी कारण उन्होंने पद पर बने रहना उचित नहीं समझा और स्वेच्छा से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
उन्होंने यह भी कहा था कि जिस राज्य से वे वेतन प्राप्त करते हैं और जहां की सेवा में कार्यरत हैं, उस प्रदेश के नेतृत्व के खिलाफ एक शब्द भी सुनना या सहन करना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने अपने बयान में यह संदेश देने की कोशिश की थी कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के सम्मान की रक्षा हर सरकारी कर्मचारी का दायित्व है।
इस्तीफे के बाद यह मामला प्रदेश भर में चर्चा का विषय बन गया था। प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। बाद में जब प्रशांत कुमार सिंह पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से जुड़ा मामला सामने आया, तो उनके इस्तीफे को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई।
Published on:
28 Jan 2026 08:32 am
बड़ी खबरें
View Allमऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
