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गैरकानूनी काम करने की हिम्मत कैसे की… सुप्रीम कोर्ट ने शरद पवार के पोते को लगाई कड़ी फटकार

महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ी फटकार लगी है। कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद रोहित पवार ने अपनी याचिका वापस ले ली है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Feb 03, 2026

Sharad Pawar Rohit Pawar MCA case

शरद पवार के साथ पोते रोहित पवार (Photo: FB/Rohit Pawar)

महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) की सदस्यता को लेकर चल रहे विवाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार (Rohit Pawar) को सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट ने एमसीए में सदस्य पंजीकरण के तरीके पर गहरा ऐतराज जताया। शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि आखिर इतनी गैरकानूनी गतिविधियां करने की हिम्मत कैसे हुई।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रोहित पवार के वकील से तीखा सवाल किया कि बिना कोर्ट की अनुमति और एमसीए संविधान में बदलाव किए इतनी बड़ी संख्या में अवैध तरीके से सदस्य बनाने की हिम्मत कैसे हुई? कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, "या तो आप अपनी याचिका वापस लें, या फिर हम इसे खारिज कर देंगे।" कोर्ट के इस कड़े रुख को देखते हुए रोहित पवार ने अपनी याचिका वापस लेना ही बेहतर समझा।

वोट बैंक बढ़ाने के लिए मनमानी का है आरोप

भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर और भाजपा नेता केदार जाधव ने इस पूरे मामले को अदालत के सामने लाया था। महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के सदस्य केदार जाधव का आरोप है कि रोहित पवार ने एमसीए पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए मनमाने तरीके से सदस्यों की संख्या 154 से बढ़ाकर सीधे 571 कर दी। इसमें 400 नए आजीवन सदस्य जोड़े गए, जिनमें अधिकांश रोहित पवार के परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और उनके व्यावसायिक संस्थानों के कर्मचारी शामिल हैं। जाधव के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया नियमों का उल्लंघन है।

पवार परिवार के सदस्यों को बनाया MCA सदस्य

केदार जाधव ने आरोप लगाया कि नए सदस्यों की सूची में रोहित पवार की पत्नी कुंती पवार, उनके ससुर सतीश मगर और सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले का नाम भी शामिल है। इसके अलावा रोहित पवार की कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी सदस्य बनाया गया है। कई राजनीतिक नेता और शैक्षणिक संस्थाओं के लोगों को भी चुनाव से ठीक पहले एमसीए का सदस्य बनाया गया। ताकि चुनाव के दौरान उनके (रोहित पवार) के पक्ष में भारी मतदान हो सके। यह सत्ता का दुरुपयोग है।  

हाईकोर्ट ने चुनाव पर लगाया था रोक

इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 6 जनवरी को होने वाले एमसीए चुनाव पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के इसी फैसले को रोहित पवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां उन्हें राहत नहीं मिली और फटकार पड़ी। इस मामले की हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 4 फरवरी को होनी है।