11 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दुकानें मिलीं न रोजगार, बिना उपयोग कॉम्पलेक्स कबाड़, पंचायत स्तर पर बने 426 कॉम्पलेक्स में 340 ही चालू

business activities at the rural level नरसिंहपुर. जिले में ग्रामीण स्तर पर व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने के साथ ही लोगों को स्वरोजगार से जोडऩे की प्रशासन की मंशा दशकों बाद भी कारगर साबित होती नहीं दिख रही है। जिले की कई ग्राम पंचायतों में शॉपिंग कॉम्पलेक्सों कर निर्माण कर बनाईं गईं करीब 86 दुकानें बिना उपयोग […]

2 min read
Google source verification
जिले की कई ग्राम पंचायतों में शॉपिंग कॉम्पलेक्सों कर निर्माण कर बनाईं गईं करीब 86 दुकानें बिना उपयोग के ही कहीं कबाड़ बनी हैं तो कहीं बंद हैं। जिले में बने 426 कॉम्पलेक्स में 340 ही संचालित हैं। जिनसे किराया वसूली भी पिछड़ी है।

ग्राम मदनपुर-इमलिया में बने कॉम्पलेक्स जो खराब हो गए हैं।

business activities at the rural level नरसिंहपुर. जिले में ग्रामीण स्तर पर व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने के साथ ही लोगों को स्वरोजगार से जोडऩे की प्रशासन की मंशा दशकों बाद भी कारगर साबित होती नहीं दिख रही है। जिले की कई ग्राम पंचायतों में शॉपिंग कॉम्पलेक्सों कर निर्माण कर बनाईं गईं करीब 86 दुकानें बिना उपयोग के ही कहीं कबाड़ बनी हैं तो कहीं बंद हैं। जिले में बने 426 कॉम्पलेक्स में 340 ही संचालित हैं। जिनसे किराया वसूली भी पिछड़ी है।
जिले में नरसिंहपुर, करेली, सांईखेड़ा, चांवरपाठा, गोटेगांव चीचली विकासखंड के कई गांवों में दशकों पूर्व जिला पंचायत शॉपिंग कॉम्पलेक्स बनाए गए थे। प्रशासन की मंशा थी कि इन कॉम्पलेक्स और दुकानों के जरिए ग्रामीण क्षेत्र में व्यापार-व्यवसाय की संभावनाएं बढ़ेंगी, लोग दुकानों को किराए पर अनुबंध के जरिए लेकर रोजगार शुरू करेंगे। जिससे उन्हें रोजगार के लिए व्यवस्थित स्थान मिलेगा और जिला पंचायत को किराए के रूप में आय होगी। लेकिन जिले की मदनपुर, इमलिया, चांवरपाठा, निवारी, करपगांव, सुआतला, पलोहा आदि गांवों में बने कॉम्पलेक्सों का शत प्रतिशत बेहतर उपयोग नहीं हो पा रहा है। मदनपुर में तो कॉम्पलेक्स की करीब आधा दर्जन दुकाने खराब हो चुकी हैं। इनकों फिर से उपयोगी बनाने, विधिवत नीलाम करते हुए ग्रामीणों को रोजगार के स्थान सुनिश्चित कराने कोई सार्थक पहल नहीं हो सकी है। मदनपुर के ग्रामीण कहते हैं कि इन कॉम्पलेक्सों का निर्माण ग्रामीण युवाओं और व्यवसायियों को स्थानीय स्तर पर व्यापार के लिए स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश ग्रामीणों को रोजगार के लिए उचित स्थान नहीं मिल सका। ग्रामीण कहते हैं कि अगर ये कॉम्पलेक्स चलन में होते, तो कई युवाओं को गांव में ही दुकानदारी करने का अवसर मिल सकता था, लेकिन कॉम्पलेक्स कबाड़ बन चुके हैं जिससे उम्मीद नहीं है कि कभी इनकी रंगत बदलेगी और यहां दुकानें खुलेंगी।
पंचायतों की अनदेखी से भी दुर्दशा
बताया जाता है कि जिन पंचायतों में यह कॉॅम्पलेक्स बनाए गए हैं उन पंचायतों के जरिए भी इनके रखरखाव और संचालन को बेहतर बनाने अनदेखी की जाती रही। क्योंकि कॉम्पलेक्सों से होने वाली आय जिला पंचायत के हिस्से में जाती है। जिला पंचायत के अधिकारी कह रहे हैं कि जो 426 कॉम्पलेक्स संचालित है उनकी किराया वसूली के लिए समय-समय पर कार्रवाई होती है। जो कॉम्पलेक्स खराब पड़े हैं उन्हें उपयोगी बनाने के लिए भी आगामी समय में कार्य कराया जाएगा। जिससे परिसंपत्तियों का संरक्षण और पुर्नउपयोग सुनिश्चित हो सके।
वर्जन
निश्चित तौर पर जिले में जहां भी कॉम्पलेक्स बने हैं उनका भौतिक सत्यापन का कार्य जल्दी ही शुरू कराया जाएगा। जो अनुपयोगी बने हैं, खराब हो गए हैं उनका सुधार भी कराएंगे और इस कार्य में पंचायतों का भी सहयोग लेंगे ताकि उनकी आय बढ़ सके।

गजेंद्र नागेश, सीईओ जिला पंचायत नरसिंहपुर