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दुश्मनी की आग में हत्या के प्रयास बढ़े, साल की शुरुआत में ही ग्वालियर रेंज में 6 वारदातें

पिछले साल की तुलना में डेढ़ गुना ज्यादा मामले

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अवैध हथियारों का बढ़ता इस्तेमाल चिंता का विषय

अवैध हथियारों का बढ़ता इस्तेमाल चिंता का विषय

अवैध हथियारों का बढ़ता इस्तेमाल चिंता का विषय

ग्वालियर। दुश्मनी की खुन्नस में जान लेने की कोशिश का खेल ग्वालियर रेंज में तेजी से बढ़ता जा रहा है। साल की शुरुआत के महज 15 दिनों में हत्या के प्रयास के 6 मामले सामने आ चुके हैं। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि संगीन अपराधों पर पुलिस के दावों के बावजूद खून-खराबे पर प्रभावी लगाम नहीं लग पा रही है।

जिला पुलिस के अपराध रिकॉर्ड के अनुसार, 1 से 15 जनवरी के बीच 6 लोगों की हत्या की कोशिश की गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 4 थी। यानी वारदातों में करीब डेढ़ गुना इजाफा हुआ है। हालात सिर्फ ग्वालियर जिले तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी रेंज में यही स्थिति बनी हुई है।

अवैध हथियार बने हत्या के प्रयास का जरिया

इन मामलों की विवेचना कर रहे पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हालिया वारदातों में आरोपियों द्वारा अवैध हथियारों का इस्तेमाल ज्यादा किया गया है। इससे अपराधों की गंभीरता और घातकता दोनों बढ़ी हैं।

जमीन, पुरानी रंजिश और रंगबाजी बनी वजह

हत्या के प्रयास की अधिकतर घटनाओं के पीछे पुरानी दुश्मनी, जमीन विवाद और रंगबाजी सामने आई है। चिंताजनक पहलू यह है कि इन वारदातों में शामिल आरोपियों में युवा वर्ग की संख्या ज्यादा है।

कानून का खौफ हो रहा कमजोर

जर, जोरू और जमीन लंबे समय से अपराधों की वजह रहे हैं, लेकिन अब छोटी-छोटी कहासुनी और मामूली विवाद भी हत्या और हत्या के प्रयास जैसी संगीन वारदातों में बदल रहे हैं। इसे कानून का खौफ कमजोर पड़ने का संकेत माना जा रहा है, जो बेहद घातक प्रवृत्ति है।

बीट सिस्टम भी नहीं दे पा रहा असर

संगीन अपराधों पर काबू पाने के लिए पुलिस मुख्यालय द्वारा बीट सिस्टम लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य गली-मोहल्लों में रंगबाजी और आपराधिक प्रवृत्ति वालों पर नजर रखना है। लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था ज्यादातर दिखावा साबित हो रही है।

अपराधियों पर सख्ती जरूरी

रिटायर्ड सीएसपी दीपक भार्गव का कहना है कि संगीन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अपराधियों पर सख्ती के साथ-साथ लोगों के पुलिस और कानून के प्रति भरोसे को मजबूत करना जरूरी है।