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दहलता बलूचिस्तान, फिर पुरानी चाल पर लौटा पाकिस्तान

बलूचिस्तान में शनिवार से शुरू हुए सबसे घातक हमलों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने के पीछे पाकिस्तान की गहरी मंशा छिपी है। यह सीमा-पार आतंकवाद की जमीन तैयार करने की उसकी पुरानी रणनीति का संकेत है। मार्च 2025 में जब बीएलए ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को अगवा किया था, तब भी पाकिस्तान ने भारत पर ऐसे ही बेबुनियाद आरोप लगाए थे। इन आधारहीन आरोपों का भारत-विरोधी माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया।

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अरुण जोशी

बलूचिस्तान में बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के एक के बाद एक समन्वित हमलों और उसके जवाब में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में दर्जनों लोगों की मौत ने एक बार फिर पाकिस्तान की अस्थिर और विस्फोटक स्थिति को उजागर कर दिया है। ये हालात न सिर्फ पाकिस्तान, अपितु पूरे क्षेत्र की शांति के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदारी किसी और की नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान की है, जिसने वर्षों से बलूचिस्तान को एक उपनिवेश समझते हुए उसके लोगों और संसाधनों का शोषण किया और विदेशी हितों को साधने में लगा रहा। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है कि बलूचिस्तान में अपने ही पैदा किए गए संकट से निपटने के बजाय पाकिस्तान ने वहां की हर गड़बड़ी का ठीकरा भारत पर फोडऩा शुरू कर दिया है। अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए भारत पर उंगली उठाना पाकिस्तान की आदत बन चुकी है। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन सच्चाई यह भी है कि पाकिस्तान की शरारत सिर्फ दोषारोपण तक सीमित नहीं रहती। इन्हीं आरोपों के सहारे वह कश्मीर पर अपने भारत-विरोधी नैरेटिव को जिंदा रखता है और अपनी हर हरकत को जायज ठहराने की कोशिश करता है।
बलूचिस्तान में शनिवार से शुरू हुए सबसे घातक हमलों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने के पीछे पाकिस्तान की गहरी मंशा छिपी है। यह सीमा-पार आतंकवाद की जमीन तैयार करने की उसकी पुरानी रणनीति का संकेत है। मार्च 2025 में जब बीएलए ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को अगवा किया था, तब भी पाकिस्तान ने भारत पर ऐसे ही बेबुनियाद आरोप लगाए थे। इन आधारहीन आरोपों का भारत-विरोधी माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया। उस समय सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने 15 अप्रैल को इस्लामाबाद में दिए अपने भाषण में दो-राष्ट्र सिद्धांत तक उछाल दिया था। इसके बाद 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए। ऑपरेशन सिंदूर से भी पाकिस्तान ने कोई सबक नहीं लिया। उस कार्रवाई में उसके आतंकी ढांचे और सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान हुआ था और वह संघर्ष विराम की गुहार लगाने पर मजबूर हो गया था। इसके बावजूद वह एक बार फिर उसी खतरनाक और षड्यंत्रकारी खेल में लौट आया है। ताजा घटनाक्रम में बीएलए ने ‘हेरोफ-2’ यानी ‘ब्लैक स्टॉर्म फेज-2’ के नाम से पूरे बलूचिस्तान में एक साथ बंदूक और बम हमले किए। संगठन का दावा है कि ये हमले पूरी तरह सुनियोजित थे और प्रांत की राजधानी क्वेटा समेत नुश्की, मस्तुंग, दल्बंदीन, कलात, कहारम, ग्वादर, पसनी, तुंप और बुलेदा जैसे दस शहरों में एक साथ किए गए। निशाने पर सैन्य और प्रशासनिक ढांचे थे, जिससे सेना और अर्धसैनिक बलों की आवाजाही बाधित हुई। पाकिस्तान ने भी इन हमलों में नुकसान और हताहत होने की बात स्वीकार की है। सेना ने जवाबी कार्रवाई में दर्जनों लोगों के मारे जाने का दावा किया और रविवार तक कम से कम 145 आतंकियों को मार गिराने की बात कही। हालांकि, क्षेत्र से आ रही खबरें बताती हैं कि कई इलाकों में अब भी झड़पें जारी हैं। खनिज संपदा से भरपूर बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। यहां के लोग लंबे समय से पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। अपनी जमीन और संसाधनों पर अधिकार की उनकी मांग को हमेशा ताकत के बल पर कुचला गया। यह सिर्फ राजनीतिक और आर्थिक भेदभाव नहीं था, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी लगातार ठेस पहुंचाई गई। हालात 2000 के शुरुआती वर्षों में और बिगड़ गए, जब परवेज मुशर्रफ के सैन्य शासन में प्रांत के सम्मानित कबायली नेताओं पर बमबारी की गई। बाद में ग्वादर बंदरगाह और अन्य संसाधनों को चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के तहत चीन को सौंपे जाने से गुस्सा और गहराया। हालिया हिंसा इसी दमित जनाक्रोश का परिणाम है। बलोची पाकिस्तान से आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ज्यादतियों को बार-बार उजागर किया है। इनमें बलोच नेताओं और आम नागरिकों के घरों पर छापे, गैरकानूनी गिरफ्तारियां, जबरन गायब करना, ‘मारो और फेंको’ की नीति और झूठे मुकदमे शामिल हैं।
पाकिस्तान में बढ़ती यह हिंसा भारत के लिए भी चिंता का विषय है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों पर सतर्क रहा है और बलूचिस्तान उन इलाकों में है जहां सैन्य दमन सबसे ज्यादा रहा है। एक ओर चीन सीपीईसी के जरिए वहां मौजूद है, तो दूसरी ओर अमरीका भी क्षेत्र की खनिज संपदा में रुचि दिखा रहा है। पाकिस्तान, भू-राजनीतिक दबावों के दौर में इन संसाधनों का लालच देकर वाशिंगटन को अपने पक्ष में करना चाहता है। बीएलए के हमलों को भारत से जोडक़र पाकिस्तान ने एक खतरनाक मोड़ दे दिया है। इसमें साफ तौर पर भारत को हर समस्या के लिए दोषी ठहराने की शरारत भी छिपी है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने दावा किया कि इन हमलों के पीछे भारत है। सेना के मीडिया विंग ने भी इसी तरह के आरोप दोहराए। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए साफ कहा कि अपनी अंदरूनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए यह पाकिस्तान की पुरानी आदत है।
भारत का यह दोहराना सही है कि पाकिस्तान का दमन, बर्बरता और मानवाधिकार उल्लंघनों का रिकॉर्ड पूरी दुनिया जानती है। इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा है और खुद को पीडि़त दिखाने के लिए दूसरों पर दोष मढ़ रहा है। लेकिन सच्चाई छिपाई नहीं जा सकती, क्योंकि दुनिया सच जानती है।