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आपकी बात: कामगार मजदूरों के बच्चों की शिक्षा के लिए किस तरह के कदम उठाए जा सकते हैं?

पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं, प्रस्तुत है पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

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समुचित प्रबंधन की आवश्यकता है
आधुनिक शिक्षा प्रणाली अधिक खर्चीली होने के कारण दैनिक कामगार मजदूर अपने बच्चों को शिक्षा नहीं दिला पा रहे हैं। उनके लिए इस महंगाई के दौर में भरपेट भोजन जुटा पाना ही मुश्किल होता है। सरकार ऐसे वर्ग के लोगों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं जैसे आवासीय विद्यालयों की स्थापना के साथ-साथ छात्रवृत्ति, यूनिफॉर्म, पाठ्य सामग्री, बीमा आदि निःशुल्क उपलब्ध करवाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ सकते हैं। - पी.सी. खंडेलवाल, जयपुर

अस्थाई कक्षाएं बनाकर शिक्षा दें
कामगार मजदूरों के पास स्थाई निवास प्रमाण पत्र नहीं होता इसलिए उनके बच्चों को बिना कागज के प्रवेश दिया जाए। इनके बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, यूनिफॉर्म और किताबें उपलब्ध करवाई जाएं। वैन या बसों को क्लासरूम बनाकर ऐसी जगह ले जाए जहां कामगार मजदूर बड़ी संख्या में निवास करते हैं। मजदूरों के बच्चों के लिए विशेष छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू करना ताकि परिवार को बच्चों की पढ़ाई आर्थिक बोझ न लगे। स्कूलों में अच्छा भोजन बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करता है और उनके कुपोषण को दूर करता है। प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय सबसे अच्छा विकल्प हैं क्योंकि इससे माता-पिता के काम बदलने पर भी बच्चे की पढ़ाई नहीं छूटेगी। - संजय सामरिया, कोटा

आर्थिक परेशानी दूर करें
कामगार मजदूरों के बच्चे मुख्यतः आर्थिक समस्याओं के कारण पढ़ नहीं पाते। उनके पास किताबें, कॉपी और स्कूल से जुड़ा खर्च उठाने के लिए पर्याप्त धन नहीं होता। इस समस्या के समाधान के लिए जरूरी है कि मजदूर वर्ग के बच्चों की शिक्षा पूरी तरह निःशुल्क हो, उनके लिए विशेष श्रेणियां तय की जाएं और हर जगह पढ़ने का समान अवसर मिले। सरकार को शिक्षा में पूर्ण सहयोग देना चाहिए और शिक्षा के महत्त्व के प्रति अभिभावकों में जागरूकता बढ़ानी चाहिए ताकि वे बच्चों के भविष्य के बारे में सोच सकें और उनका जीवन सफल बन सके। - हरिओम शर्मा, जयपुर

सुधारात्मक कक्षाएं लगाएं
कामगार मजदूरों के बच्चों के लिए शिक्षा प्राप्त करना बहुत कठिन काम है। घर के हालात ऐसे होते हैं कि चाहते हुए भी वे शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं। इनकी पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप दी जानी चाहिए, जिससे इन्हें वित्तीय सहायता मिले। इन बच्चों को व्यवहारिक शिक्षा ज्यादा और गृहकार्य कम दें। इन बच्चों की विशेष सुधारात्मक कक्षाएं लगाई जाए जिससे ये कम समय में अधिक ज्ञान प्राप्त कर सकें। जनजागरूकता कार्यक्रमों की तरह मजदूरों के घर जाकर उनके माता-पिता को पढ़ाई के प्रति जागरूक करना चाहिए। - निर्मला वशिष्ठ, अलवर

पोर्टेबल स्कूल व्यवस्था शुरू करें
जो सड़कें, पुल और इमारतें मजदूरों के पसीने से खड़ी होती हैं, उन्हीं मजदूरों के बच्चे अक्सर शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं। अस्थायी निवास, लगातार पलायन और आर्थिक संकट बच्चों के सपनों को बीच रास्ते में रोक देते हैं। इस दिशा में केवल नीतियां नहीं, बल्कि जमीन पर उतरने वाले समाधान चाहिए। हर निर्माण स्थल पर अस्थायी शिक्षण केंद्र, पलायन करने वाले बच्चों के लिए पोर्टेबल स्कूल व्यवस्था और समाज के सहयोग से पुस्तक, पोषण व मार्गदर्शन कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। शिक्षा कोई सुविधा नहीं, बल्कि हर बच्चे का अधिकार है। जब एक मजदूर का बच्चा पढ़ता है, तो वह केवल अपनी किस्मत नहीं बदलता, बल्कि समाज और देश की दिशा भी बदलता है। - डॉ. दीपिका झंवर, जयपुर

बच्चों के लिए छात्रावास बनाएं
रोजगार के लिए पलायन करने वाले लोगों के बच्चे प्राथमिक शिक्षा से वंचित रह जाते हैं ऐसे लोगों के बच्चों की शिक्षा के लिए सरकार को कार्यस्थल के नजदीकी स्कूलों में दाखिल करवाने की व्यवस्था करनी चाहिए। काम के लिए पलायन करने वाले मजदूरों के बच्चों के लिए उनके पैतृक निवासों के आसपास छात्रावास की व्यवस्था करने से बच्चों को पलायन नहीं करना पड़ेगा। इस प्रकार इनके बच्चों को शिक्षा से वंचित होने से बचाया जा सकता है। - हुकुम सिंह पंवार, इंदौर

वित्तीय सहायता उपलब्ध हो
कामगार मजदूरों के बच्चों की शिक्षा के लिए सर्वप्रथम आर्थिक बाधाओं को दूर करना आवश्यक है। निःशुल्क शिक्षा, पुस्तकें, यूनिफॉर्म और छात्रवृत्ति की व्यवस्था की जाए। कार्यस्थलों के पास आवासीय विद्यालय और डे-केयर केंद्र खोले जाएं, जिससे पलायन का असर कम हो। डिजिटल शिक्षा, स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी तथा अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाकर इन बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है। - संजय माकोड़े, बैतूल

बच्चों को छात्रवृत्ति दी जाए
कामगार मजदूर वर्ग के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनको समाजसेवी संस्थानों द्वारा निःशुल्क शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा सकता है। इसके साथ ही बाल श्रम रोकने हेतु एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। श्रमिक बस्तियों में स्कूल, आंगनबाड़ी और साक्षरता केंद्र खोले जाएं। बच्चों को छात्रवृत्ति और नगद सहायता प्रदान कर शिक्षा से जोड़ा जा सकता है। - सतीश उपाध्याय, मनेद्रगढ़

आवासीय स्कूल शुरू करें
कामगार मजदूरों के बच्चों को सबसे पहले बाल श्रम से बचाना चाहिए। इन बच्चों को शिक्षा और कौशल विकास के लिए प्रशिक्षित करे ताकि वे बेहतर करियर बना सकें। इसके अलावा छात्रवृत्ति, अटल आवासीय विद्यालय जैसे आवासीय स्कूल, व्यावसायिक प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता प्रदान करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। साथ ही शिक्षकों का सहयोग लेकर सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है। - सुरेश विश्नोई, फलौदी