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पटना, Jun 06, 2026

जेब में थे सिर्फ 40 रुपये, आज करोड़ों छात्रों के गुरु हैं खान सर; NDA में नहीं हो पाया था सलेक्शन

खान सर बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत में दूसरी कोचिंग में पढ़ाकर अपना खर्च चलाया, जहां शुरुआत में केवल 6 छात्र थे, लेकिन उनकी पढ़ाने की शैली से छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती गई। बाद में फीस बढ़ाने को लेकर मतभेद होने पर उन्होंने वह कोचिंग छोड़ दी।

Patna famous Teacher Khan Sir on NEET paper Leak

पटना के फेमस शिक्षक खान सर (फोटो- वीडियो ग्रैब)

देश के चर्चित शिक्षकों में खान सर एक प्रमुख नाम हैं। वे कठिन से कठिन विषयों को सरल भाषा में समझाने के लिए छात्रों के बीच लोकप्रिय हैं। उनका अनोखा पढ़ाने का अंदाज और कम फीस उन्हें अन्य शिक्षकों से अलग बनाता है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले खान सर एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देवरिया के एक स्कूल से प्राप्त की, जबकि उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरी की। उन्होंने बीएससी और एमएससी की डिग्री हासिल करने के बाद भूगोल में एमए भी किया।

सेना में सेवा देने के उद्देश्य से फैसल खान उर्फ खान सर ने एनडीए की परीक्षा दी थी, जिसे उन्होंने पास भी कर लिया था, लेकिन मेडिकल कारणों से उनका चयन अंतिम रूप से नहीं हो सका।

40 रुपये से शुरू हुआ संघर्ष

खान सर बताते हैं कि एनडीए में असफल होने के बाद उन्होंने एक समय जीवन से हार मान ली थी और घर लौटना चाहते थे। लेकिन उस समय उनके पास घर जाने के लिए 90 रुपये किराया भी नहीं था, जबकि उनकी जेब में केवल 40 रुपये थे। इसी परिस्थिति ने उनके भीतर फिर से संघर्ष करने की प्रेरणा जगाई और यहीं से उनके जीवन की नई शुरुआत हुई।

इसके बाद उन्होंने कोचिंग की शुरुआत की और अपने सपनों को आगे बढ़ाया। उनका कहना है कि यदि उस समय वे घर लौट जाते, तो शायद आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक नहीं पहुंच पाते।

वे यह भी बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग छात्रों को पढ़ाया और उनसे कभी फीस नहीं ली। इन्हीं छात्रों के आशीर्वाद और समर्थन को वे अपनी सफलता का महत्वपूर्ण कारण मानते हैं। यही वजह है कि वे आज भी जरूरतमंद और गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने का प्रयास करते हैं।

6 बच्चों से शुरू हुआ खान सर का सफर

खान सर बताते हैं कि अपने खर्च चलाने के लिए उन्होंने शुरुआत में दूसरी कोचिंग में भी पढ़ाया था। वहां शुरुआत में केवल 6 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन उनकी पढ़ाने की शैली से प्रभावित होकर धीरे-धीरे छात्रों की संख्या बढ़ती गई।

बाद में संस्थान द्वारा छात्रों से अधिक फीस लेने की मांग की जाने लगी, जिसको लेकर मतभेद उत्पन्न हो गया और उन्होंने वह कोचिंग छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने अपनी कोचिंग की शुरुआत की, जिसका नाम “खान ग्लोबल स्टडीज” रखा गया। खान सर का दावा है कि उनकी फीस सबसे कम है, हालांकि पटना में अब उनसे भी कम फीस में पढ़ाने वाले कई शिक्षक मौजूद हैं।

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