
सिवनी. इंदौर में दूषित पानी की वजह से कई लोगों की जान चली गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हालांकि इस घटना सेशिक्षा विभाग ने कोई सीख नहीं ली और न ही पानी गुणवत्ता जांच के लिए आदेश स्कूलों को जारी किए। ऐसे में जिले में संचालित सैकड़ों शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को शुद्ध जल नसीब नहीं हो पा रहा है। स्कूलों में विद्यार्थी कैसा पानी पी रहे हैं इसको लेकर शनिवार को ‘पत्रिका’ ने जिले के स्कूलों में जांच पड़ताल की। अधिकतर स्कूल में लापरवाही सामने आई। अधिकतर शासकीय स्कूलों में लंबे समय से पानी की जांच नहीं कराई गई है। किसी स्कूल में विद्यार्थियों को बोरिंग का पानी पिलाया जा रहा है, किसी में हैंडपंप का, तो किसी स्कूल में टंकी का पानी पिलाया जा रहा है। कई स्कूलों की छत पर पानी की टंकी रखी हुई हैं। जहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ी भी नहीं है। ऐसे में वर्षों से टंकियों की सफाई भी नहीं हुई है। टंकी पर या स्कूल के रिकॉर्ड में पानी टंकी की सफाई का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, जबकि हर स्कूल को समय-समय पर पानी की टंकी सफाई कराकर उसकी तिथि लिखनी चाहिए। शाला प्रबंधन की लापरवाही के चलते बच्चों को बिना जांच-पड़ताल के पानी पिलाया जा रहा है। वर्षों से जिन टंकियों की सफाई नहीं हुई है उसी में से ही बच्चों के लिए खाना भी बनाया जा रहा है।
पानी गुणवत्ता के जांच के नहीं दिए आदेश
पत्रिका टीम ने जब शासकीय स्कूल प्राचार्यों से बात की तो उनका कहना था कि पानी की गुणवत्ता की जांच करवाने के अभी कोई आदेश नहीं मिले हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रदेश के अधिकतर जिलों में शिक्षा विभाग ने स्कूलों को पानी की गुणवत्ता की जांच करवाने के आदेश जारी कर दिए हैं। जिसमें कहा गया है कि वे पानी के सैंपल पीएचई को भेजकर जांच कराएं, ताकि पता चले कि किस शाला के बच्चे किस प्रकार का पानी पी रहे हैं। इतने गंभीर मामले के बाद भी सिवनी में शिक्षा विभाग ने स्कूलों को आदेश जारी नहीं किए।
बोरिंग हैंडपंप की जांच वर्षों से नहीं हुई
पत्रिका ने शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के शासकीय स्कूलों में जांच पड़ताल की तो पता चला कि अधिकतर शालाओं में बोरिंग, हैंडपंप या नल जल योजना के अंतर्गत आ रहा पानी पिलाया जा रहा है। हैंडपंप या बोरिंग के पानी की जांच वर्षों से नहीं हुई है।
शा. माध्यमिक शाला, शीलादेही में खुली मिली टंकी
‘पत्रिका’ टीम शनिवार को शा. माध्यमिक शाला, शीलादेही पहुंची। यहां रसोई घर के ऊपर पानी की दो टंकी रखी हुई थी। एक टंकी का ढक्कन खुला हुआ था। मौजूद जिम्मेदारों से जब पूछा गया तो उनका कहना था कि बच्चे हैंडपंप से पानी पीते हैं। टंकी में जो पानी जाता है उससे रसोई घर में खाना बनता है। पानी का सैम्पल जांच के लिए कोई आदेश नहीं आया है। टंकी की सफाई भी लगभग तीन वर्ष पहले की गई है। इसका भी कोई रिकॉर्ड स्कूल में मौजूद नहीं था। पानी का सैम्पल भी कभी स्कूल से जांच के लिए नहीं भेजा गया। इस स्कूल में 50 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
फील्टर से पीला रहे पानी, नहीं भेजा सैम्पल
शा. कन्या हाईस्कूल, खैराा पलारी में पत्रिका टीम ने जांच पड़ताल की। यहां स्कूल भवन की छत पर पानी की तीन टंकी रखी हुई थी। जिम्मेदारों ने बताया कि यहां पीने के लिए पानी नल जल योजना के माध्यम से आता है। उसे स्कूल के तीन टंकियों में भरा जाता है और आरोह फील्टर के माध्यम से बच्चों को पीने के लिए दिया जाता है। टंकियों की सफाई बीते 19 जनवरी को की गई थी। पानी की गुणवत्ता जांच के लिए सैम्पल नहीं भेजा गया है। इस स्कूल में 370 छात्राएं अध्ययनरत हैं।
इनका कहना है…
सभी शैक्षणिक संस्थानों को स्वच्छता को लेकर आदेश जारी किए गए हैं। हर स्कूल की यह नैतिक जिम्मेदारी भी है कि वह बच्चों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करे।
महेश बघेल, जिला परियोजना समन्वयक, सिवनी
जिले के किसी भी स्कूल से अभी पानी के सैम्पल जांच के लिए नहीं आए हैं। अगर आएंगे तो जांच की जाएगी।
आरजी गभने, प्रभारी, डीडब्ल्यूयूटीएल(पीएचई), सिवनी
Published on:
01 Feb 2026 02:53 pm
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