11 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

T20 वर्ल्डकप में इंग्लैंड के कोच कर रहे ICC के नियमों का उल्लंघन? दोनों मैचों में करते देखे गए ये काम

टी20 वर्ल्ड कप (ICC T20 World Cup 2026) में इंग्लैंड के कोच ब्रेंडन मैक्कलम (Brandon McCullum) वॉकी-टॉकी के जरिए खिलाड़ियों को निर्देश देते नजर आए। जोस बटलर ने इसे फायदेमंद बताते हुए कहा कि क्रिकेट में कोचिंग के तरीके अब बदल रहे हैं और मैक्कलम बेहद होशियार कोच हैं।

3 min read
Google source verification

भारत

image

Saksham Agrawal

Feb 10, 2026

ब्रेंडन मैक्कलम

ब्रेंडन मैक्कलम (फोटो- ANI)

टी20 वर्ल्ड कप (ICC T20 World Cup 2026) में नेपाल (Nepal) के खिलाफ मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए मैच के दौरान इंग्लैंड (England) के हेड कोच ब्रेंडन मैक्कलम (Brandon McCullum) वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करते हुए नजर आए। ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान मैक्कलम ने इस डिवाइस के जरिए कप्तान हैरी ब्रुक और अन्य खिलाड़ियों को सीधे निर्देश दिए। नेपाल ने कांटे की टक्कर देते हुए इंग्लैंड के लिए मैच बेहद मुश्किल बना दिया था। इंग्लैंड सिर्फ 4 रन से मैच जीता, अंतिम ओवर में सैम करन ने शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन किया और 10 रनों को डिफेंड करने में कामयाब हुए।

क्या कहते हैं नियम?

आइसीसी (ICC) के प्लेयर एंड मैच ऑफिशियल्स एरिया नियमों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ियों और टीम स्टाफ को मैदान और ड्रेसिंग रूम में मोबाइल, लैपटॉप या स्मार्टवॉच जैसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस रखने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है, ताकि खेल की निष्पक्षता बनी रहे।

हालांकि, इस नियम में कुछ अपवाद हैं:

  • आइसीसी के नियम वॉकी-टॉकी जैसे टू-वे हैंडहेल्ड डिवाइस के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं, ताकि टीम स्टाफ डगआउट और ड्रेसिंग रूम के बीच मेडिकल समस्याओं के लिए या रणनीति बनाने के लिए इंसट्रक्शन भेज सके।
  • इसका इस्तेमाल केवल निश्चित फ्रीक्वेंसी और एन्क्रिप्शन के साथ किया जाना चाहिए, ताकि कोई बाहरी व्यक्ति इसे सुन न सके।
  • इस्तेमाल करने के लिए मैच के पहले आइसीसी के एंटी-करप्शन ऑफिसर से अनुमति लेना भी जरूरी है।

बटलर ने किया मैक्कलम का समर्थन

मंगलवार को की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंग्लैंड के सीनियर बल्लेबाज जोस बटलर (Joss Buttler) ने कोच मैक्कलम की इस कोचिंग स्टाइल की तारीफ की। बटलर ने कहा, "वॉकी टॉकी का इस्तेमाल काफी समय से हो रहा है। हमारी टीम में ऊपर से नीचे तक कम्युनिकेशन हमेशा बेहतरीन रहा है। मैक्कलम आराम से पैर ऊपर करके और धूप का चश्मा लगाकर बैठे नजर आते हैं, लेकिन वह जितने होशियार कोच हैं, उतना मैंने किसी को नहीं देखा।"

आशीश नेहरा की मिसाल दी

बटलर ने यह भी कहा कि क्रिकेट में अब कोच मैदान पर ज्यादा सक्रिय हो रहे हैं। उन्होंने अपने आईपीएल के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा, "मैंने गुजरात टाइटंस के लिए खेला है। आशीष नेहरा बाउंड्री पर बेहद एक्टिव रहते थे। लेकिन दूसरे खेलों की तुलना में क्रिकेट अभी भी पीछे है। फुटबॉल और फॉर्मूला वन में मैनेजर और कोच लगातार खिलाड़ियों से बात करते हैं। क्रिकेट में भी अब धीरे-धीरे यह बदलाव आ रहा है।"

विल जैक्स ने भी इस तरीके को प्रभावी बताया और कहा कि यह कप्तान या बल्लेबाजों तक जानकारी पहुंचाने का एक सरल और कारगर तरीका है।

ऐसे कोच जिन्होंने कोचिंग को दी नई दिशा

क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे कोच रहे हैं जिन्होंने नए तरीकों का इस्तेमाल कर खेल को नई दिशा दी।

  • बॉब वूलमर: दक्षिण अफ्रीका और पाकिस्तान के कोच रहे वूलमर ने क्रिकेट कोचिंग में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू किया था। वह वीडियो एनालिसिस करने वाले पहले कोचों में से थे। उन्होंने कप्तान के कान में ईयरपीस लगाकर मैदान पर निर्देश देने की शुरुआत की, जिसे बाद में आईसीसी ने प्रतिबंधित कर दिया।
  • जॉन बुकनन: ऑस्ट्रेलिया को 1999 से 2007 तक कोचिंग देने वाले बुकानन ने लैपटॉप का इस्तेमाल कर डाटा एनालिसिस करने की शुरुआत की। उन्होंने मानसिक मजबूती और फिटनेस पर भी खास जोर दिया।
  • गैरी कर्स्टन: भारत को 2011 विश्व कप जिताने वाले कर्स्टन ने स्पोर्ट्स साइंस और खिलाड़ियों के विकास पर जोर दिया। उन्होंने शांत और भरोसेमंद माहौल बनाकर सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों से सजी टीम को सही दिशा देने का काम किया।
  • आशीष नेहरा: गुजरात टाइटंस के हेड कोच नेहरा बाउंड्री पर फुटबॉल की तरह सक्रिय कोचिंग के लिए जाने जाते हैं। वह स्ट्रैटेजिक टाइम-आउट के दौरान भी मैदान में आकर खिलाड़ियों से बात करते हैं और हर ओवर के बाद गेंदबाजों को निर्देश देते हैं। उनकी इस शैली ने गुजरात की टीम को आइपीएल टाइटल जिताने में अहम भूमिका निभाई।
  • एंडी फ्लावर: इंग्लैंड को 2010 में टी20 विश्व कप जिताने और 2011 में टेस्ट रैंकिंग में नंबर वन बनाने वाले फ्लावर ने अनुशासन, कड़ी मेहनत और मानसिक मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने टीम फर्स्ट की मानसिकता विकसित की।