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जेल अधीक्षक हुए ठगी का शिकार, हुई 4 महीने में 50 लाख की ठगी, जस्ट डायल से आये थे संपर्क में

Jail superintendent becomes victim of fraud. उन्नाव के जिला कारागार के जेल अधीक्षक ठगी का शिकार हो गए।‌ उनसे 50 लाख रुपए की ठगी की गई है, जिसमें बैंक ड्राफ्ट और आरटीजीएस के माध्यम से पैसे लिए गए हैं।

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उन्नाव जिला कारागार, फोटो सोर्स- पत्रिका

, फोटो सोर्स- पत्रिका

Jail superintendent becomes victim of fraud: उन्नाव के जेल अधीक्षक साइबर ठगी का शिकार हो गए। बेटी के मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए धीरे-धीरे करके 4 महीने में 50 लाख रुपए की ठगी का शिकार हो गए। ‌वे जस्ट डायल के जरिए कंसल्टेंसी प्रोपराइटर के संपर्क में आए थे। जिसने मेडिकल कॉलेज में सीट सुरक्षित करने का आश्वासन दिया था। पैसे मिलने के बाद मोबाइल स्विच ऑफ हो गया और बाद में लखनऊ ऑफिस में ताला लगा मिला। जस्ट डायल से भी कंसल्टेंसी से जुड़ी जानकारी हटा दी गई। जेल अधीक्षक ने कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है। मामला सदर कोतवाली का है।

बाराबंकी स्थित मेडिकल कॉलेज में एडमिशन का मिला था आश्वासन

उत्तर प्रदेश के उन्नाव के सदर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत जिला कारागार के जेल अधीक्षक पंकज कुमार सिंह ने जस्ट डायल के माध्यम से पाथवे कंसलटेंसी से संपर्क किया। जिसमें प्रोपराइटर अभिनव शर्मा से बातचीत हुई और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए उनसे सहायता मांगी। अभिनव शर्मा ने सफेदाबाद, बाराबंकी स्थित हिंद मेडिकल कॉलेज में एडमिशन कराने का आश्वासन दिया। इसके बदले पैसे की डिमांड हुई। अपनी तहरीर में पंकज कुमार सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए उनसे बड़ी रकम की डिमांड की गई।‌

4 महीने में 50 लाख की ठगी

पंकज कुमार सिंह ने बताया कि 18 जुलाई 2025 को आईसीआईसीआई बैंक अकाउंट से 10 लाख रुपए का पहला ड्राफ्ट दिया गया, जबकि 19 जुलाई 2025 को एक और 10 लाख रुपए का ड्राफ्ट बनवाया गया। इसके अतिरिक्त, 24 अक्टूबर 2025 को अभिनव शर्मा ने कोटक महिंद्रा बैंक विभव खंड गोमती नगर लखनऊ के खाते में 30 लाख रुपए भेजने को कहा, जिसे आरटीजीएस के माध्यम से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाते से ट्रांसफर किया गया।

मोबाइल बंद ऑफिस में लगा ताला

पंकज कुमार सिंह ने बताया कि जब उन्होंने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश को लेकर अभिनव मिश्रा से संपर्क करने का प्रयास किया तो मोबाइल स्विच ऑफ आया। लखनऊ स्थित कार्यालय विजय खंड गोमती नगर के तीसरे तल में संपर्क करने गए तो वहां भी ताला बंद मिला। यही नहीं, जस्ट डायल से भी कंसल्टेंसी की जानकारी को हटा दिया गया। खोजबीन के दौरान जानकारी हुई कि अभिनव शर्मा और संतोष कुमार संगठित गिरोह के सदस्य हैं जो फर्जी बैंक खातों और ऑफिस के जरिए लोगों को ठगने का काम करते हैं। आरोपियों के खिलाफ प्रदेश के कई जिलों में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। ‌