पुलिस कंट्रोल रूम में मंगलवार को पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय ने यह खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि आरोपी सकरिया पिता झीतरा वसुनिया (46) निवासी काछला थाना, रतन पिता नाहरू उर्फ नारू (45) निवासी तडवी फालिया भोयरा और विनोद पिता धन्ना उर्फ धनसिंग डामोर (34) निवासी कुशलपुरा को गिरफ्तार किया है।
आरोपियों से 500 ग्राम सोने के आभुषण, एक देशी पिस्टल और तीन मोबाइल जब्त किए गए। आरोपियों की जानकारी जुटाने पर यह बात सामने आई की सभी आदतन व संगठित अंतर राज्यीय अपराधी है। मध्यप्रदेश के साथ ही, महाराष्ट्र एवं गुजरात के विभिन्न थानों में हत्या, डकैती, लूट तथा अन्य गंभीर करीब एक दर्जन से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली तीनों टीमों को पूर्व में घोषित 20 हजार का इनाम दिया जाएगा। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस को जंगल में भी रहना पड़ा।
लंगड़ी चाल बना अहम सुराग, चावल बनाकर खाने से रूट का चला पता
डकैती को सुलझाने के लिए सीसीटीवी कैमरे के फुटेज देखे गए। पुनासा से महेश्वर तक पुलिस ने 150 पाइंट पर लगे सीसीटीवी कैमरे के वीडियो देखे। इसमें घटनास्थल पर मिले फुटेज आरोपियों तक पहुंचने में कारगर साबित हुए। फुटेज देखकर आरोपियों का स्कैच तैयार किया था। साथ ही मुख्य आरोपी सकरिया लंगड़ा कर चल रहा था। इसी से उसकी पहचान हो सकी। वहीं आरोपियों ने एक गांव के पास जंगल में चावल बनाकर खाए थे। ग्रामीणों ने उन्हें देखकर पुलिस को सूचना कर दी थी। इससे पुलिस को आरोपियों के भागने का रूट पता चला।
क्षेेत्र से गायब होने पर हुआ शक
पुलिस ने लूट व डकैती करने वाले 12 गिरोह की जानकारी निकाली। जिसमें जबलपुर, मंडला एवं आसपास के जिलों में सक्रिय हाल ही में पकड़े गए गिरोह भी शामिल थे। तब पता चला की झाबुआ की सकरिया रतन गैंग घटना के बाद से अपने क्षेत्र में नहीं है। इसके बाद झाबुआ में उनके ठिकानों पता लगाकर पुलिस ने सिविल ड्रेस में रैकी की, तब पता चला की आरोपियों को उनके गांव जाकर पकड़ना मुश्किल है। इसके लिए पुलिस ने आरोपियों का अपने गांव से बाहर निकलने तक इंतजार किया। मंगलवार को जैसे ही आरोपी गहने ठिकाने लगाने के लिए निकलने उन्हें पकड़ लिया।
तीन टीमों की मेहनत लाई रंग
इस मामले में पुलिस अधीक्षक ने तीन टीम बनाई थी। एक टीम में दस पुलिसकर्मी थी। नर्मदानगर थाना प्रभारी विकास खिंची, पुनासा चौकी प्रभारी एसआइ राजेंद्र सयदे और एसआइ राजू पाटिल ने एक-एक टीम का नेतृत्व किया। एएसआइ सुरेश डाबर, महेंद्र यादव, विरेंद्र बिसेन, सूरज पाटील, प्रधान आरक्षक महेंद्र वर्मा, सायबर सेल जितेंद्र राठौर, विक्रम वर्मा, रफिक खान, आरक्षक सुनील लांडगे, अनिल बछाने, रामनरेश यादव, जितेंद्र मंडलोई सहित अन्य ने किया।