नागौर. शहर की सडक़ों पर भटक रहे ज्यादातर गोवंश लावारिश नहीं, बल्कि पालतू हैं। घरों में दूध दुहने के बाद इन्हें सडक़ों पर छोड़ दिया जाता है। नतीजा यह कि बाजारों, चौराहों और मुख्य मार्गों पर गोवंश का जमावड़ा लग रहा है और यातायात व्यवस्था चौपट हो रही है।
पकड़ के बाद फोन-जुगाड़ का खेल
नगरपरिषद की ओर से धरपकड़ शुरू होते ही पकड़े गए पशुओं को छुड़ाने के लिए फोन कॉल, पहचान और गरीबीज् की दुहाई दी जाने लगी है। अधिकारी बताते हैं कि कई लोग नगरपरिषद पहुंचकर या सिफारिश के जरिए पशु छुड़वाने की कोशिश करते हैं। जिससे पूरे अभियान की मंशा कमजोर पड़ रही है।
अधिकारियों का सवाल: पालतू हैं तो छोड़े क्यों
नगरपरिषद अधिकारियों का साफ कहना है कि यदि गोवंश पालतू हैं तो उन्हें सडक़ों पर छोड़ा ही क्यों जा रहा है। पकड़े जाने के बाद गरीबी या रसूख का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
वीडियो रिकॉर्डिंग से होगी पारदर्शिता
धरपकड़ के दौरान टीमें वीडियो रिकॉर्डिंग भी करेंगी, ताकि बाद में कोई किंतु-परंतु न कर सके। इससे कार्रवाई की पारदर्शिता बनी रहेगी और दबाव बनाने की कोशिशें विफल होंगी।
गंदगी, पॉलिथिन और खतरा
अधिकारियों के अनुसार शहर के कई इलाकों में पालतू पशुओं के कारण हालात खराब हो चुके हैं। गोवंश कचरे के ढेर में भोजन तलाशते हैं। जिससे गंदगी फैलती है और पॉलिथिन निगलने का खतरा बढ़ता है। यह पशुओं के स्वास्थ्य के साथ शहर की स्वच्छता पर भी भारी पड़ रहा है।
अब सीधा जुर्माना, कोई रियायत नहीं
नगरपरिषद ने स्पष्ट किया है कि आगे से सख्ती बरती जाएगी। नियम तोडऩे पर सीधे पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। किसी तरह की पहचान, जान-पहचान या दबाव काम नहीं आएगा।
हॉटस्पॉट इलाके
शहर के गांधी चौक, सदर बाजार, तहसील चौक, नया दरवाजा, दिल्ली दरवाजा और मानसार चौराहा जैसे क्षेत्रों में गोवंश का जमावड़ा लगातार देखा जा रहा है, जिससे ट्रैफिक बाधित हो रहा है और हादसों का जोखिम बढ़ रहा है। नगरपरिषद का कहना है कि इन इलाकों में अभियान और तेज किया जाएगा।
क्या कहते हैं अधिकारी …..
नगरपरिषद आयुक्त गोविंद सिंह भींचर ने बताया कि धरपकड़ के लिए कुल पांच टीमें गठित की गई हैं। पूरे शहर को जोन के हिसाब से बांटा गया है। सडक़ों पर पशु मिले तो न रसूख चलेगा, न गरीबी का बहाना। प्रावधानों के अनुसार पूरी कार्रवाई होगी और जुर्माना वसूला जाएगा।