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कड़ाके की ठंड में सड़क पर तिरपाल से आड़ कर हुई महिला की डिलीवरी, टॉर्च की रोशनी में बच्चे ने लिया जन्म

MP Health Service : महिला ने सिस्टम की उदासीनता का खामियाजा भुगतते हुए कड़ाके की ठंड में बीच सड़क पर, महज तिरपाल की आड़ में अपने बच्चे को जन्म दिया है। घटना स्वास्थ्य सुविधाओं की गंभीर उदासीनता को उजागर करती है।

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महिला ने सड़क पर दिया बच्चे को जन्म (Photo Source- Patrika)

MP Health Service :मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर करोड़ों का फंड जारी होता है। शासन-प्रशासन की ओर से बेहतर सुविधा और व्यवस्थाएं करने के तमाम दावे किए जाते हैं। लेकिन, समीन पर इसकी सच्चाई बेहद शर्मनाक है। इसकी बानगी राज्य के किसी दूर-दराज के बीहड़ इलाके में नहीं, बल्कि राजधानी से सटे विदिशा जिले में देखने को मिली है। यहां कड़ाके की ठंड में इंसानियत को झकझर देने वाली घटना पठारी से सामने आई है। दरअसल, यहां एक महिला ने सिस्टम की उदासीनता का खामियाजा भुगतते हुए कड़ाके की ठंड में बीच सड़क पर, महज तिरपाल की आड़ में अपने बच्चे को जन्म दिया है।

इलाके के अंतर्गत आने वाले छपारा गांव में रहने वाली आदिवासी महिला संध्या को प्रसव पीड़ा शुरु हुई। इसपर परिजन ने गुरुवार रात 3 बजे से लगातार 108 एंबुलेंस और जननी एक्सप्रेस को कॉल करना शुरु किया। लेकिन, विभाग की ओर से की गई इन दोनों ही व्यवस्थाओं से कोई मदद नहीं मिली। महिला की प्रसव पीड़ा बढ़ने और देरी से होने वाले नुकसान के आभास के चलते घर वाले मजबूर होकरगर्भवती महिला को पैदल ही अस्पताल की तरफ लेकर निकले, लेकिन कड़ाके की ठंड में महिला का सड़क पर ही प्रसव हो गया।

दर्द से तड़पती रही प्रसूता

घटना गढ़ी मोहल्ला क्षेत्र की सरकारी राशन दुकान के सामने हुई। कड़ाके की ठंड में महिला सड़क पर तड़पती रही। परिजन ने उसे प्लास्टिक की तिरपाल से ढककर ठंड से बचाने का प्रयास किया। बच्चे की नाल जुड़ी होने के कारण महिला काफी समय तक सड़क पर ही दर्द से तड़पती रही। लेकिन, इसी बीच पठारी की महिला चौकीदार हरी बाई मौके से गुजरीं। उन्होंने महिला को तड़पता देख तत्काल स्थानीय दाई राज बाई को बुलाया और उनकी मदद से महिला की सुरक्षित डिलीवरी कराई। बाद में एक स्थानीय युवक महिला और नवजात को अपने वाहन से अस्पताल लेकर पहुंचा। इस तरह चौकीदार हरी बाई और अन्य शख्स की तत्परता से एक मां और उसके नवजात की जान बच सकी।

'समय पर नहीं मिली सुविधा'

संध्या के पति संजय आदिवासी का कहना है कि, अगर समय पर एंबुलेंस या जननी एक्सप्रेस मिल जाती तो उसकी पत्नी को इस असहनीय पीड़ा सहने और कड़ाके की ठंड में सड़क पर प्रसव जैसी स्थिति नहीं बनती।

स्वास्थ्य विभाग ने लिया संज्ञान

घटना की जानकारी मिलने के बाद सीएमएचओ डॉ. रामहित कुमार शुक्रवार दोपहर पठारी पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि, मामले की जांच की जा रही है और लापरवाही पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।