5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बोर्ड परीक्षा का तनाव: सिर दर्द, नींद न आना और चिड़चिड़ापन के लक्षण बढ़े

Ahmedabad: 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के नजदीक आते ही विद्यार्थियों में पढ़ाई का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। अहमदाबाद के मनोचिकित्सकों का कहना है कि इस दौरान कुछ बच्चों में मानसिक तनाव के लक्षण दिखते हैं, लेकिन समय पर मोटीवेशन और सही मार्गदर्शन से स्थिति को संभाला भी जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है […]

2 min read
Google source verification
ahmedabad news mentle health

file photo

Ahmedabad: 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के नजदीक आते ही विद्यार्थियों में पढ़ाई का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। अहमदाबाद के मनोचिकित्सकों का कहना है कि इस दौरान कुछ बच्चों में मानसिक तनाव के लक्षण दिखते हैं, लेकिन समय पर मोटीवेशन और सही मार्गदर्शन से स्थिति को संभाला भी जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वे बच्चों पर सीधे अंक का दबाव न डालें, बल्कि उन्हें सकारात्मक पढ़ाई और आत्मविश्वास के लिए प्रेरित करें।

अहमदाबाद मानसिक आरोग्य अस्पताल के मनोचिकित्सक डा. रमाशंकर यादव का कहना है कि ज्यादातर बच्चे पढ़ाई को मैनेज कर लेते हैं, लेकिन जो शुरुआत से पढ़ाई से दूर रहते हैं, वे परीक्षा नजदीक आते ही दबाव में आकर शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान होने लगते हैं। इनमें सिर दुखना, नींद न आना और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण दिखते हैं। ऐसे में उन्हें मानसिक उपचार के साथ-साथ काउंसलिंग की भी जरूरत होती है। उनका मानना है कि इनमें ज्यादातर वे बच्चे होते हैं जो शुरुआती समय में पढ़ाई से दूर रहते हैं लेकिन जब परीक्षा नजदीक आती है तो दबाव सहन करने में असमर्थ रहते हैं। कुछ बच्चों पर तो यह प्रेशर इतना हावी हो जाता है कि उनके मन में आत्महत्या तक के विचार आते हैं। ऐसे में माता-पिता को सतर्क रहने की जरूरत है। उनके अनुसार बोर्ड परीक्षा के दिनों में बच्चों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन सकारात्मक पढ़ाई, अभिभावकों का सहयोग और मोटीवेशन से बच्चे मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं।

दुगने तक केस

अहमदाबाद के हेल्थ अस्पताल के मनोचिकित्सक डा. ऋषिराज जोशी ने बताया कि सामान्य पढ़ाई के दिनों में दो से तीन केस आते हैं, लेकिन दिसंबर से फरवरी तक यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन चार से पांच तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें समय-समय पर प्रेरित करते रहना चाहिए। साथ ही मोबाइल के व्यर्थ खास कर सोशल मीडिया के उपयोग पर लगाम लगानी चाहिए। परीक्षा का दबाव सहन नहीं करने वाले कुछ केस उनके अस्पताल में आते हैं जो इस प्रकार हैं।

केस स्टडी

केस 1:12वीं कॉमर्स का छात्र नशे की लत के कारण पढ़ाई से दूर रहा। परीक्षा का दबाव बढ़ने पर उसे नींद न आना और सिर दर्द जैसी समस्याएं होने लगीं। अस्पताल में काउंसिलिंग और उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ।केस 2:

केस 2ः 10वीं का छात्र मोबाइल पर इतना व्यस्त रहता था कि छोटी-छोटी बातों पर आक्रोशित हो जाता। परीक्षा नजदीक आने पर उसके लक्षण और बढ़ गए। इनमें बेहोश होना, खुद को चोट पहुंचाना और भ्रम की स्थिति जैसे लक्षण भी शामिल हैं। उसे महसूस होता था कि कोई तलवार लेकर उन्हें मारने के लिए आ रहे हैं। इस तरह की मानसिक स्थिति में अस्पताल में भर्ती कर काउंसिलिंग दी गई, जिसके बाद हालत सुधरी।

केस 3:12वीं साइंस की छात्रा सोशल मीडिया पर दोस्ती में उलझी रही और पढ़ाई से दूर हो गई। परीक्षा नजदीक आते ही वह मानसिक रूप से डिस्टर्ब होने लगी। उपचार और काउंसिलिंग के बाद अब वह सामान्य है और परिवार को परेशान नहीं कर रही। इससे पूर्व पूरा परिवार परेशान हो गया था।