7 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

REEL नहीं REAL स्टोरीः AK-47 चलाने वाला 50000 का इनामी यह गैंगस्टर अब बनेगा प्रोफेसर, पास की NET-JRF परीक्षा

Gangster To Professor Story: जिस युवक पर पुलिस ने 50 हजार का इनाम रखा था और जिसका भविष्य जेल की सलाखों के पीछे खत्म माना जा रहा था, लेकिन उसने अपनी तकदीर खुद बदल डाली है।

2 min read
Google source verification

अलवर

image

Jayant Sharma

Feb 07, 2026

crime news pic

50000 Reward Gangster Clears UGC NET: राजस्थान के बहरोड़ थाने पर हुए उस सनसनीखेज हमले को कौन भूल सकता है ? जब एके47 की गूंज ने पूरे देश को हिला दिया था, कुख्यात गैंगस्टर विक्रम उर्फ पपला गुर्जर को लॉकअप तोड़कर भगाने वालों में एक नाम दीक्षांत का भी था। जिस युवक पर पुलिस ने 50 हजार का इनाम रखा था और जिसका भविष्य जेल की सलाखों के पीछे खत्म माना जा रहा था, लेकिन उसने अपनी तकदीर खुद बदल डाली है।

हरियाणा के महेन्द्रगढ़ का रहने वाला है दीक्षांत, पपला गुर्जर का खास दोस्त

महेंद्रगढ़ के खैरोली गांव के रहने वाले दीक्षांत ने हाल ही में अंग्रेजी विषय में यूजीसी-नेट जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण कर सबको चौंका दिया है। यह वही दीक्षांत है, जो कभी पपला गुर्जर का दायां हाथ, माना जाता था, लेकिन आज वह शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य गढ़ रहा है। दीक्षांत शुरू से ही पढ़ने में मेधावी था। 12वीं में 90 फीसदी अंक और बीएससी में फर्स्ट डिवीजन लाने वाले इस युवक की राहें तब भटक गईं, जब वह अपने ही गांव के गैंगस्टर पपला गुर्जर के संपर्क में आया।

गैंगस्टर पपला गुर्जर के ऐशोआराम और रौब देखकर हुआ प्रभावित, खुद भी बनना चाहता था डॉन

दीक्षांत काफी समय पहले से ही पपला के संपर्क में था। हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में पपला गुर्जर का बदमाशों के बीच रौब देखकर वह उसके जैसा बनने का सपना देखने लगा और इस बीच पढ़ाई एवं परिवार से दूर जाता रहा। 2019 में जब पपला को राजस्थान पुलिस ने पकड़ा और अलवर की बहरोड़ जेल में रखा तो उसे निकालने का जिम्मा दीक्षांत ने उठाया और पूरी कार्रवाई को लीड करते हुए पपला गुर्जर को हवालात से भगा ले गया। उसके बाद पुलिस ने उस पर पचास हजार का इनाम रखा, उसे अरेस्ट किया गया तो वह तीन साल तक लगातार जेल में रहा।

जेल में हुआ हृदय परिवर्तन…

अक्सर कहा जाता है कि जेल अपराधी को और बड़ा अपराधी बना देती है, लेकिन दीक्षांत के मामले में यह सुधार गृह साबित हुई। सलाखों के पीछे बिताए तीन सालों ने उसे आत्ममंथन का मौका दिया। उसने महसूस किया कि अपराध की चकाचौंध सिर्फ बर्बादी की ओर ले जाती है। जेल से बाहर आने के बाद उसने पुरानी पहचान को दफन कर दिया और किताबों से दोबारा दोस्ती की। जेल के अंदर भी उसकी पढ़ाई जारी रही।

अब सपना, देश का भविष्य संवारना

अंग्रेजी से एमए करने के बाद अब नेट-जेआरएफ परीक्षा क्लियर करना यह साबित करता है कि इरादे मजबूत हों तो कालिख भी कुंदन बन सकती है। दीक्षांत अब पीएचडी करना चाहता है ताकि वह किसी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनकर युवाओं को सही राह दिखा सके। इसके लिए लगातार तैयारी जारी है। हालांकि कोर्ट की तारीखें और केस की प्रक्रिया भी साथ चल रही है।

समाज के लिए एक बड़ा सबक

राजस्थान और हरियाणा के युवाओं के लिए दीक्षांत की यह कहानी एक वेक-अप कॉल जैसी है। यह कहानी बताती है कि गलती किसी से भी हो सकती है, लेकिन असली नायक वही है जो अपनी गलती को सुधारकर मुख्यधारा में लौट आए। दीक्षांत का अपराधी से स्कॉलर बनने का यह सफर उन सभी के लिए जवाब है जो मानते हैं कि एक बार रास्ता भटकने के बाद वापसी मुमकिन नहीं।