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World Cancer Day: तेजी से बढ़ रहा कैंसर का ग्राफ, शुरुआत में लक्षण पहचाने तो बचे जान   

World Cancer Day कैंसर के मरीजों की संख्या चिंताजनक गति से बढ़ रही है। हालांकि पुरुषों की तुलना में महिला कैंसर रोगियों की संख्या कम है, लेकिन महिलाओं में भी कैंसर के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं।

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World Cancer Day अलवर जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या चिंताजनक गति से बढ़ रही है। वर्ष 2021 में अलवर के सामान्य अस्पताल में कैंसर यूनिट की शुरुआत के बाद से अब तक 22 हजार 565 कैंसर मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच चुके हैं। हर साल मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2021 में कैंसर मरीजों की संख्या 1067 थी, जो 2022 में बढ़कर 2883 हो गई। कैंसर की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2023 में यह आंकड़ा उछलकर 9129 तक पहुंच गया। वहीं, 2025 में कैंसर मरीजों की संख्या 15 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है।

मुंह व गले के कैंसर के मरीज सबसे ज्यादा

सामान्य अस्पताल में इलाज के लिए आ रहे कुल मरीजों में से करीब 55 प्रतिशत मरीज मुंह और गले के कैंसर से पीड़ित हैं। इसके अलावा 20 प्रतिशत मरीज फेफड़ों और लगभग 25 प्रतिशत मरीज आंत के कैंसर से ग्रसित हैं। वहीं, मुंह व गले के कैंसर से पीडि़त ज्यादातर पुरुषों की उम्र 35 से 45, फैफड़े के कैंसर से पीडि़त मरीजों की 40 से 55 और आंत के कैंसर से पीडि़त मरीजों की उम्र 40 से 55 वर्ष के बीच की है।

महिलाएं भी कैंसर की चपेट में

हालांकि पुरुषों की तुलना में महिला कैंसर रोगियों की संख्या कम है, लेकिन महिलाओं में भी कैंसर के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। अस्पताल में स्तन कैंसर, बच्चेदानी के मुंह का कैंसर और फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित महिलाएं इलाज के लिए पहुंच रही हैं। इसमें स्तन कैंसर से पीडि़त महिलाओं की उम्र 35 से 40 व बच्चेदानी के मुंह के कैंसर से पीडि़त महिलाओं की उम्र 50 वर्ष से अधिक है। इसके अलावा कुछ महिलाएं मुंह के कैंसर से पीडि़त भी अस्पताल में इलाज के लिए आ रही है।जिनकी उम्र 50 से अधिक है।

ये कारण आ रहे सामने

चिकित्सकों के अनुसार मुंह व गले के कैंसर का सबसे बड़ा कारण गुटखा और तंबाकू का सेवन है। इसके साथ अत्यधिक शराब सेवन भी कैंसर के खतरे को बढ़ा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार मुंह व गले के कैंसर का मुख्य कारण गुटखा व तंबाकू के सेवन के साथ अत्यधिक शराब का सेवन सामने आ रहा है। इसके अलावा अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता, वायु प्रदूषण, हानिकारक विकिरण सहित कुछ संक्रमण भी कैंसर के कारण के रूप में सामने आ रहे हैं।

शुरुआती चरण में पहचान बड़ी चुनौती

विश्व में असामयिक मृत्यु के प्रमुख कारणों में कैंसर शामिल है। भारत में लगभग 38 लाख कैंसर मरीज हैं और हर साल करीब 16 लाख नए मरीज जुड़ रहे हैं। लगभग 8 लाख मरीजों की मृत्यु कैंसर के कारण हो रही है। कैंसर रजिस्ट्रेशन के अनुसार केवल 33 प्रतिशत मरीजों की पहचान प्रारंभिक स्तर पर हो पाती है, जबकि 66 प्रतिशत मरीजों में रोग की पहचान द्वितीय व तृतीय चरण में होती है - डॉ. सुखबीर तंवर, वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ, सामान्य अस्पताल।

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